बूंदी: 14 जनवरी शनिवार को कोरोना काल के 2 साल बाद मकर सक्रांति के त्यौहार पर पूरे प्रदेश वासियों ने बच्चे युवा और महिलाओ ने दिन भर जमकर पतंगबाजी कर डीजे की धुन पर नाचे! भारत देश का मकर सक्रांति का ऐसा पर्व है कि इस पर ऊपर लोग सवेरे 4:00 बजे से जग कर अपने मकानों की छत पर पतंग उड़ाने लग जाते हैं तथा डीजे की धुन पर नाचने लग जाते हैं इस हर्ष उल्लास के त्यौहार पर सभी लोगों के मन में भाईचारा बढ़ता है और आपस में महिलाएं पुरुष और युवा पतंग को लड़ाते हैं पेच काटते हैं तथा शोर होता है यह कटी वह कटी के नारे खुशी-खुशी लगाते हैं! लोगों में इतना उत्साह होता है इस त्योहार पर कि इतनी सर्दी शीतलहर शीतलन के होते हुए भी उनको सर्दी का एहसास नहीं होता है लोग इस दिन गायों को चारा डाल कर दान पुण्य प्राप्त करत हे जिससे लोगों के मन में एक धार्मिक आत्मविश्वास पैदा होता हे
मकर संक्रांति पर्व परम्परागत धार्मिक श्रद्धा व विश्वास के साथ मनाया जा रहा है। लोगों ने अलसुबह ही स्नान कर मंदिरो में श्रद्धा के साथ पूजापाठ की तथा उगते हुए सूर्यनारायण को अर्घ्य दिया। अब दिनभर दान-पुण्य का दौर चलेगा। पिछले 2 साल के कोरोना काल के चलते हुए त्योहारों का आनंद पिका पड़ा हुआ था लोगों ने भंडारों में दाल, बेसन के साथ मिक्स पकौडों, कचौडी, बेढ़ई, जलेबी, इडली सांभर, खीर, पूड़ी, सब्जी आदि बनाकर लोगों को श्रद्धाभाव से परोस रहे हैं। सदर बाजार में दुकानों पर पतंग और डोरिया खरीदने वालों लगी होने से दुकानदारों में काफी उत्साह और खुशी महसूस हो रही थी क्योंकि 2 साल से दुकानदारों की पतंग और डोरियों की सेल नहीं हुई थी लोग साधु-संतो व जरुरतमंदाें को कपड़े, कंबल आदि वितरित कर रहे हैं। लोगों ने वस्त्र, अन्न, खिचड़ी सहित अन्य खाद्य वस्तुओं का दान किया। महिलाओं ने मन्नत मांग कर 14 वस्तुओं का दान कर बड़े-बुजुर्गो का आशीर्वाद लिया। पर्व पर तिल के विशेष महत्व के चलते तिल की बनी बर्फी, लड्डू ,गजक आदि बनाए गए हैं। मकर संक्रांति पर लोगों ने बहादुर सिंह सर्किल पेच ग्राउंड पर गायों को हरा चारा डालकर गौ माता से आशीर्वाद प्राप्त किया! इस प्रकार से मकर सक्रांति के पर्व पर पूरे दिन धूमधाम से सभी लोगों ने हंसी-खुशी आनंद उल्लास के साथ मनाया!
संवाददाता पुरुषोत्तम बूंदी