अतिप्राचीन सतयुग कालीन भगवान श्रीविष्णु के पांचवें अवतार श्रीवामन राजा बलि का मूलधार्मिक धाम पिचियाक मंदिर (बिलाड़ा) के मुख्य महंत श्रीश्री 1008 श्री अर्जुन दास जी (अखिल भारतीय क्षत्रिय सरगरा समाज के धार्मिक गुरु गादीपति महंत) जी ने जो बात आज सरगरा समाज को बताई है उस बात से मैं सहमत हूं।मैंने स्वयं ने शुरु से अर्थात कई सालों से समाज के ग्रुपों में और समाज के क ई बंधुओं को* *बताया भी है कि हमारा सरगरा समाज क्षत्रिय महाराजा सगर अर्थात सागर के वंशज हैं और हमारे समाज की उत्पत्ति अर्थात समाज का निर्माण वामन अवतार के समय ही हुआ है क्षत्रिय सरगरा समाज के आदिगुरु राजा बलि है और सरगरा समाज के आराध्य भगवान श्रीवामन विष्णु के पांचवें अवतार है भगवान श्री वामन का अवतार स्वर्ग में हुआ और स्वर्ग से ही सीधे राजा बलि के यज्ञ स्थल पिचियाक बिलाड़ा में उतरे थे। वे स्वर्ग के निवासी थे इसलिए हमारे समाज का नामकरण सरगरा हुआ प्राचीन काल से हमारे सरगरा समाज ने राजाओं के द्वारपाल बने क्योंकि भगवान श्री वामन भी राजा बलि के द्वारपाल बने थे वे अब भी बने हुए हैं और वे आगे भी बने रहेंगे।*
*कुल मिलाकर बात यही सत्य है कि क्षत्रिय सरगरा समाज के आदी गुरु राजा बलि बने थे और सरगरा समाज के आराध्य भगवान श्रीवामन अर्थात श्री विष्णु भगवान ही है।*
*इसलिए पिचियाक क्षत्रिय श्रीसरगरा समाज की गुरुगादी धाम है*
*।।जय भगवान श्री वामन अवतार की।।*
*।।जय दानवेन्द्र राजा बलि की।।*
*।।जय क्षत्रिय सरगरा समाज की।।*
*।।जय पावन,पवित्र,निर्मल धार्मिक धाम पिचियाक(बिलाड़ा)की।।*
इंडियन टी वी न्युज रिपोर्टर भरत गेहलोत कोसेलाव 9784915665