ब्यूरो चीफ सुन्दरलाल जिला सोलन
,प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर कसौली पर्यटन स्थल सुविधाओं के अभाव में दिन प्रतिदिन दूषित होता जा रहा है । कसौली पर्यटन स्थल अंग्रेजों के शासनकाल के समय अपने आप में पूरे भारत वर्ष में सैलानियों को बरबस अपनी ऒर आकर्षित करता है । यहां के ऐतिहासिक धरोहरों की बनावटों व प्राकृतिक सौंदर्य ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं । सुंदर पहाड़ीयों की गोद में प्राकृतिक सुंदरता व प्रकृति के अद्भुत नजरों से परिपूर्ण यह पर्यटक स्थल सैलानियों का आकृषित केंद्र बना हुआ है । परन्तु सरकारी उपेक्षा के कारण यह स्थल दिन प्रतिदिन अपने अस्तित्व व सुंदरता से ओझल होता नजर आ रहा है । कसौली में व उसके आसपास के क्षेत्रों में हो रहे बेतहाशा निर्माण कार्यों व सही ढंग की सीवरेज की व्यवस्था न होने , शौचालय की कमी व जरूरत से ज्यादा पॉलीथिन के हो रहे प्रयोग, पर्यटकों की सुंदरता को ग्रहण लगा दिया है ।इस पर्यटन स्थल में बने शौचालयों की सीवरेज की व्यवस्था न होने के कारण जहां प्रतिदिन आ रहे सैंकड़ों सैलानियों के अभाव से जूझना पड़ रहा है। वहीं इस क्षेत्र में बढ़ती गन्दगी से यह पर्यटन स्थल प्रदूषित हो रहा है। हिमाचल सरकार द्वारा पर्यावरण के बचाव तथा स्वच्छता बनाये रखने की दृष्टि से राज्य में सभी प्रकार के पॉलीथिन कैरी बैगों ,प्लास्टिक से बने सभी डिस्पोजल वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है । बावजूद इसके पॉलिथीन का धड़ल्ले से प्रयोग किये जाने से जहां सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं । वही प्रकृति की भी सुंदरता का उपहास उड़ाया जा रहा है।
प्लास्टिक के बढ़ते प्रचलन को रोकने में जहां राजनीतिज्ञ , स्थानीय प्रशासन प्रदूषण बोर्ड कोई रुचि लेता नही दिखाई दे रहा है । छावनी बोर्ड में बसे इस पर्यटन स्थल में जहां की साफ सफाई की जिम्मेदारी कैंट बोर्ड की है ,लेकिन कैंट बोर्ड के पास जो कूड़ा जलाने का संयंत्र होने के बावजूद भी सफाई कर्मचारी कूड़े को खुले में फेंक रहे हैं । जिससे पॉलीथिन के कैरी बैग हवा मैं उड़ कर पूरे पर्यटन स्थल की पहाड़ी पर फैले हुए हैं ।जिससे पूरा पर्यटन स्थल प्रदूषित होता जा रहा है ।यहाँ जहां पर शौचालय व कूड़ादान का अभाव है । वहीं यहां पर्यावरण के प्रेमियों व आम जनता को अफसोस इस बात का है कि सरकार व यहां का प्रशासन के उदासीन रवैये से जहां पर्यटन स्थल दिन प्रतिदिन प्रदूषित होता जा रहा है वहीं यहां के राजनीतिज्ञों द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है ।पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि पॉलीथिन व मिनरल वाटर की बोतलों से सड़क के साथ लगते क्षेत्र व पर्यटन स्थल भरे पड़े हैं । यदि बढ़ते प्रदूषण को नहीं रोका गया तो यह भविष्य के लिए खतरनाक हो सकता है । कसौली के वरिष्ठ नागरिक एवम पूर्व पार्षद दविंदर गुप्ता कहना है कि पर्यटन नगरी कसौली में पेयजल की भारी कमी है । यहां पर स्वच्छ भारत की जैसी योजना को लागू करने के लिए पानी अधिक जरूरत है । परंतु इसके लिए प्रदेश सरकार को उचित कदम उठाये जाने अति आवश्यक जरूरत है । उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखबिंदर सिंह सूखू से मांग उठाई है कि कसौली को गिरी नदी से निर्माणाधीन पेयजल योजना के कार्य को जल्द पूरा करने के उचित आदेश जारी करे