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अपना जीवन परमात्मा पर अर्पण करने से बड़ा भाग्य कुछ नहीं हो सकता है- ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी

अपना जीवन परमात्मा पर अर्पण करने से बड़ा भाग्य कुछ नहीं हो सकता है- ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा ब्रह्माकुमारी अनु बहन का अलौकिक समर्पण दिवस की प्रथम वर्षगांठ बनाई गई जिसमें ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्ष 1937 में ब्रह्माकुमारीज की नींव रखी गई। तब से लेकर अब तक 87 वर्ष में संस्थान में 50 हजार ब्रह्माकुमारी बहनों ने अपनी जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित किया है। ये बहनें तन-मन-धन के साथ समाजसेवा, विश्व कल्याण और सामाजिक, आध्यात्मिक सशक्तिकरण के कार्य में जुटी हैं। संस्थान द्वारा संपूर्ण भारतवर्ष को 12 विभिन्न जोन में बांटा गया है। इन जोन में एक मुख्य निदेशिका और फिर स्थानीय सेवाकेंद्र में जिला स्तर पर मुख्य निदेशिका होती हैं जो अपने-अपने जिलों में सेवाएं देती हैं। शुरुआत में नई बहनें बड़ी बहनों के मार्गदर्शन में रहती हैं फिर उन्हें नया सेवाकेंद्र खोलने की अनुमति प्रदान की जाती है। अनु बहन का समर्पण दिवस को याद कर मन खुशी से झूम रहा है। ये बहन बहुत भाग्यशाली हैं। जीवन में अपने कर्मों से समाज में नए उदाहरण प्रस्तुत करें। अपना जीवन परमात्मा पर अर्पण करने से बड़ा भाग्य कुछ नहीं हो सकता है। आपकी वाणी दुनिया के कल्याण का माध्यम बने। आपका एक-एक कर्म उदाहरणमूर्त हो। धरती से अंधकार मिटाने और ज्ञान प्रकाश फैलाने में शिव की शक्ति, भुुजा बनकर, साथी बनकर सदा जीवन में आगे बढ़ते रहें। ब्रह्माकुमारी रुक्मणि दीदी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि जीवन वही श्रेष्ठ है जो प्रभु के नाम समर्पित हो जाये। विश्व कल्याण के लिए इस बहन ने जो अपना सर्वस्व ईश्वर के प्रति समर्पित किया है इससे महान कार्य और कुछ भी नही हो सकता। मुझे खुशी होती है यह देखकर कि आज के मॉडर्न युग मे भी ये बहन दुनिया की चकाचौंध को छोड़ आध्यात्मिकता में अपनी रुचि रखे हुए हैं। धन्य है ऐसे माता पिता जो इन जैसी कन्याओं को जन्म दिया। इस देश को श्रेष्ठ बनाने के लिए विकारों रुपी दुर्गुणों से स्वयं मुक्त होकर अनेकों को मुक्ति प्राप्त कराने के लिए अनु बहन ने अपना जीवन प्रभु अर्पित किया है तो यह बहुत बड़ा कार्य है। बाल अवस्था में कन्याएं श्रेष्ठ संस्कारों से युक्त होकर ब्रह्माकुमारी की शिक्षाओं का पालन कर रही है। यह ब्रह्माकुमारी बहने अपनी शिक्षा पूर्ण कर ईश्वरीय विश्व विद्यालय के नियमों के पालन करते हुए माता-पिता की स्वीकृति प्राप्त कर समाज कल्याण के लिए अथक रूप से अपना योगदान दे रही है। यह अलौकिक समर्पण एक तरह से अलौकिक विवाह की तरह होता है जिसमे परमपिता परमात्मा शिव को साक्षी मानकर ब्रह्माकुमारी बहने अपना जीवन भगवान शिव को अर्पित करती है। इस मौके पर मनीषा दीदी ने भी अपने आशीर्वचन रखे और साथ-साथ सभी मेहमानों का शब्दों के माध्यम से आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा अगर हम अपने समय व शक्ति को मानव की भलाई के कार्य मे लगाएं तो हमारा जीवन आनन्द से भरपूर हो सकता है।

जिला गुना से गोलू सेन की रिपोर्ट

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