अयोध्या।
बीकापुर विकासखड क्षेत्र के करहिया बसंतपुर गांव में आयोजित की जा रही सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस अयोध्या से पधारे कथा व्यास पंडित प्रेमधर जी महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा के दौरान सती प्रसंग ध्रुव चरित्र का विस्तार से व्याख्यान किया। सती कथा के दौरान कथा व्यास द्वारा भगवान शिव और सती जी के संवाद का वर्णन किया गया बताया कि भ्रमण के दौरान भगवान शिव अपने दिव्य दृष्टि से रामचंद्र जी का दर्शन करते हैं और प्रणाम करते हैं सती जी को आश्चर्य होता है कि उनके पति शिव जी तीनों लोगों के स्वामी हैं फिर भी किसको प्रणाम कर रहे हैं। शिवजी सती जी की शंका का समाधान करते हैं। सती चरित्र में भगवान शिव की पत्नी उमा के अपने पिता दक्ष के यज्ञ में जाने का प्रसंग सुनाया गया। शिव की अनुमति बिना यज्ञ में जाने पर सती ने अपमानित होकर यज्ञ कुंड में आत्मोत्सर्ग कर दिया। इससे भगवान शिव के गणों ने राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। कथा व्यास ने कहा कि जहां सम्मान न मिले, वहां नहीं जाना चाहिए। बालक ध्रुव जी की कथा का रोचक वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथा व्यास ने आगे बताया कि भगवान की भक्ति करने से मनुष्य के सभी पाप मिट जाते हैं। हर व्यक्ति को अपने जीवन में भगवान की भक्ति जरूर ही करनी चाहिए। क्योँकि भक्ति से ही मनुष्य का जीवन सदा के लिए सुधर सकता है। उसके सभी पाप धुल जाते है। जो खेल बीत गया है उसको याद मत करो। अब जो बचा है उसका सदुपयोग कर ले तो जीवन का सदुपयोग हो सकता है। जो भी व्यक्ति केवल सात दिन ही श्रीमद भागवत कथा को सुनता है तो उसको जीवन में मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। इस मोक्ष को पाने के लिए बड़े से बड़े ऋषि मुनि भी कड़ी तपस्या में लगे रहते है। लेकिन फिर भी उनको मोक्ष मिले यह निश्चित नहीं होता है। आरती और प्रसाद वितरण के साथ तीसरे दिन की कथा को विश्राम दिया गया। कथा के दौरान मुख्य अजमान पारस नाथ मिश्रा, सुशीला देवी, राजनाथ मिश्रा, अमरनाथ, रविंद्र कुमार, राघवेंद्र मिश्रा सहित तमाम श्रोता मौजूद रहे।
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