कड़वा है मगर सच
दोस्तों अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम ना भेजें I अपने मां-बाप की सेवा करें उनकी जिंदगी का सहारा बनें, उनके बुढ़ापे की लाठी बनें I
आधुनिकता की अंधी दौड़ के कारण भारत में वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ती जा रही हैं जो बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है I आज कई मां-बाप को अपनी जिंदगी का अंतिम चरण व पड़ाव बच्चों से दूर वृद्ध आश्रमों में गुजारना पड़ रहा हैं। हिंदू धर्म / सनातन संस्कृति में माता-पिता को देवता मानने वाले बेटे अब मां बाप को ही बोझ समझने लगे हैं।
मां बाप को वृद्धाश्रम में भेजने मे किसी की बेटी का ही महत्वपूर्ण योगदान होता है वरना बेटे अपने माँ बाप को शादी के पहले ही वृद्धाश्रम क्यों नही भेजते?
ऐसा मेरा विश्वास है कि माँ बाप की सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं। वास्तव मे माँ बाप की सेवा ही, भगवान की सेवा है । किसी ने सच ही कहा है कि माँ बाप की सेवा करो जमीन पे ही स्वर्ग मिलेगा I
भारत जैसे देश में जहाँ माँ बाप को भगवान व देवता तुल्य समझा जाता है वहां पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी से वृद्ध आश्रम बढे है, मैं भारत में वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या को देखकर चिंतित और हैरान हूँ।
रक्तदान महादान, रक्तदान जीवनदान है
Iरमेशसैनीसहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़