सहारनपुर की नगर पंचायत छुटमलपुर में सभासद अंकुर सैनी ने बुलाई पंचायत
पूर्व जिलाध्यक्ष बिजेंद्र कश्यप पर 18 लाख 70 हजार रुपये हड़पने का संगीन आरोप: पंचायत में खुलासा, क्षेत्र में सनसनी!
दिनांक: 31 मार्च 2025, स्थान: फतेहपुर शिव मंदिर
एक सनसनीखेज घटनाक्रम में पूर्व जिलाध्यक्ष बिजेंद्र कश्यप पर सभासद अंकुर सैनी के 18 लाख 70 हजार रुपये हड़पने का गंभीर आरोप लगा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र के सम्मानित लोगों ने सर्व समाज की पंचायत बुलाई, जिसमें बिजेंद्र कश्यप की कथित धोखाधड़ी और साजिश की परतें खुलकर सामने आईं। यह मामला अब न सिर्फ आर्थिक अपराध का रूप ले चुका है, बल्कि क्षेत्र में जातिवाद और राजनीतिक अस्थिरता फैलाने की सनसनीखेज कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
पंचायत में अंकुर सैनी का खुलासा: बिजेंद्र पर सीधा हमला
पंचायत में सभासद अंकुर सैनी ने अपनी बात रखते हुए साफ कहा, “बिजेंद्र कश्यप पर मेरे 18 लाख 70 हजार रुपये बकाया हैं। कुछ राशि उन्होंने दी, लेकिन बाकी रकम देने में वह लगातार टालमटोल कर रहे हैं।” अंकुर ने यह भी आरोप लगाया कि बिजेंद्र न केवल पैसे लौटाने से इनकार कर रहे हैं, बल्कि मामले को दबाने के लिए तरह-तरह के हथकंडेadopt कर रहे हैं। इस बयान ने पंचायत में मौजूद लोगों के बीच हलचल मचा दी।
प्रधान अनुज कंबोज का सवाल: “आखिर साजिश क्या है?”
क्षेत्र के प्रभावशाली प्रधान अनुज कंबोज ने मामले की गहराई में जाकर कहा, “यह तथ्य स्थापित हो चुका है कि बिजेंद्र कश्यप पर अंकुर सैनी के 18 लाख 70 हजार रुपये बकाया हैं। लेकिन वह पैसे क्यों नहीं लौटा रहे? इसके पीछे उनकी क्या मंशा है, यह समझ से परे है।” अनुज ने संकेत दिया कि बिजेंद्र की चुप्पी और टालमटोल के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र हो सकता है, जिसकी जांच जरूरी है।
सुधीर सैनी का गंभीर आरोप: “बिजेंद्र की मानसिकता ओछी”
बाछापुर के प्रधान सुधीर सैनी ने बिजेंद्र कश्यप की मंशा पर सीधा प्रहार करते हुए कहा, “यह स्पष्ट है कि बिजेंद्र की मानसिकता पैसे लौटाने की नहीं है। इतना ही नहीं, वह पूर्व विधायक नरेश सैनी का नाम घसीटकर इस मामले को राजनीतिक और जातिगत रंग देना चाहते हैं, जो बेहद निंदनीय है।” सुधीर ने खुलासा किया कि नरेश सैनी ने ही बिजेंद्र को जिलापंचायत सदस्य बनवाया था, और अब वह उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। “यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा लगता है,” सुधीर ने जोड़ा।
भाजपा नेता उपेंद्र सैनी का कड़ा रुख: “क्षेत्र का माहौल खराब करने की कोशिश”
भाजपा के वरिष्ठ नेता उपेंद्र सैनी ने बिजेंद्र कश्यप की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “बिजेंद्र क्षेत्र में अशांति फैलाना चाहते हैं। जिसके पैसे हैं, उसे दे देना चाहिए था। इसे जातिवाद और राजनीति से जोड़ना उनकी कुटिल चाल है।” उपेंद्र ने नरेश सैनी पर लगाए गए आरोपों को “निराधार और दुर्भावनापूर्ण” करार देते हुए बिजेंद्र के बयानों की कड़े शब्दों में निंदा की।
7 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन: बिजेंद्र का ढीठ जवाब
विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत ने एक सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया, जिसमें प्रधान सुधीर सैनी, अनुज कंबोज, पत्रकार दिनेश सैनी, सुशील उपाध्याय, और अंकित वर्मा शामिल हैं। कमेटी ने बिजेंद्र कश्यप से फोन पर संपर्क किया और उनसे जवाब मांगा। बिजेंद्र ने पहले तो घर बुलाकर बात करने का दिखावा किया, लेकिन जब कमेटी ने दबाव बढ़ाया, तो उन्होंने साफ कह दिया, “मैं अब पैसे नहीं दूंगा। मेरा इसमें कोई रोल नहीं है।” इस ढीठ रवैये ने कमेटी को स्तब्ध कर दिया और उनकी मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
पंचायत का माहौल: तनाव और आक्रोश
पंचायत की अध्यक्षता सुशील सैनी ने की, जबकि संचालन पंकज भैय्या ने किया। बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने बिजेंद्र के रवैये पर गहरा आक्रोश जताया। लोगों का कहना है कि बिजेंद्र न सिर्फ आर्थिक धोखाधड़ी में लिप्त हैं, बल्कि क्षेत्र की एकता को तोड़ने की साजिश भी रच रहे हैं।
तथ्यों का विश्लेषण: बिजेंद्र कश्यप के खिलाफ सबूत
1. आर्थिक अपराध अंकुर सैनी के 18 लाख 70 हजार रुपये बकाया होने का दावा पंचायत में सत्यापित।
2. राजनीतिक साजिश नरेश सैनी का नाम घसीटकर मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश।
3. जातिवाद का खतरा सर्व समाज की एकता को भंग करने की मंशा।
4. कमेटी का निष्कर्षबिजेंद्र का पैसे न लौटाने का स्पष्ट इनकार।
क्षेत्र में सवाल: क्या है बिजेंद्र का अगला कदम?
बिजेंद्र कश्यप की इस हरकत ने क्षेत्र में तनाव पैदा कर दिया है। लोग अब यह जानना चाहते हैं कि क्या वह सचमुच इतना नीचे गिर गए हैं कि अपने ही लोगों के बीच नफरत की आग भड़काना चाहते हैं? उनकी चुप्पी और इनकार से यह साफ है कि वह न तो जवाबदेही लेना चाहते हैं और न ही अपनी गलती सुधारना। यह मामला अब स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर कानूनी और सामाजिक जांच की मांग कर रहा है।