शोभायात्रा के दौरान मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा की। करौंदी कला में आयोजित विशाल जनसभा में वक्ताओं ने भगवान परशुराम के जीवन पर प्रकाश डाला।
परशुराम जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। भगवान परशुराम विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं। वे माता रेणुका और ऋषि जमदग्नि के पुत्र थे। उनका जन्म प्रदोष काल में हुआ था। वे शिव के परम भक्त थे और चिरंजीवी माने जाते हैं। इस वर्ष यह पर्व 30 अप्रैल को मनाया गया। इसी दिन अक्षय तृतीया का त्योहार भी मनाया जाता है।।श्री परशुराम भगवान की जयंती के शुभ अवसर पर श्री परशुराम जन कल्याण सेवा समिति द्वारा पांच ब्राम्हणों का कराया गया वृत्त बंध एवं निकाली गई विशाल शोभा यात्रा
मुख्य अतिथि रहे समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शशि कुमार मिश्रा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजय शंकर द्विवेदी एवं प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा द्विवेदी रीवा जिला अध्यक्ष रामयश अवस्थी और समित के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे
आप को बता दे कि श्री परशुराम भगवान की जयंती पर श्री परशुराम जन कल्याण सेवा समिति के द्वारा श्री रामेश्वर धाम मंदिर कराहिया में किया गया विशाल भंडारे का आयोजन और साथ ही कराया गया 5 ब्राम्हणों का व्रत बांध और निकली विशाल शोभा यात्रा जो श्री रामेश्वर धाम मंदिर से कराहिया मंडी होते हुए बीड़ा तिराहा से माकूनी तालाब मैदानी होकर रामेश्वर धाम मंदिर में किया गया समापन जिसमें शहर के सभी परशुराम भगवान के भक्तों ने लिया बढ़ चढ़ के हिस्सा और लगाए जयकारे सारा शहर गुजा भगवान श्री परशुराम के जयकारों से
समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजय शंकर द्विवेदी ने बताया कि ये शोभा यात्रा हर साल ऐसे ही धूम धाम से मनाई जाती है
उन्हें ने कहा कि हमें गर्भ है हम हिन्दू है
*रीवा से ब्यूरो चीफ कृष्णा द्विवेदी*