नरेश सोनी
इंडियन टीवी न्यूज
ब्यूरो हजारीबाग
कांग्रेस नेता मुन्ना सिंह ने डीवीसी को दिया अल्टीमेटम
कहा अगर उजाला नहीं मिलेगा तो कोयला भी नहीं जाएगा
शिक्षा और बिजली दोनों के अभाव में कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता- मुन्ना सिंह
हजारीबाग: मंगलवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में कांग्रेस पार्टी सदर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी सह नगर प्रभारी मुन्ना सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उनका वक्तव्य केवल राजनीतिक आरोप नहीं था, बल्कि जनसरोकारों की गूंज थी उस जनता की, जो बिजली के बिना अंधेरे में जी रही है और शिक्षा के अभाव में भविष्य से वंचित होती जा रही है। प्रेस वार्ता की शुरुआत बिजली संकट के मुद्दे से हुई। मुन्ना सिंह ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस ज़िले की धरती से देशभर के ताप विद्युत संयंत्रों के लिए प्रतिदिन हज़ारों टन कोयला भेजा जाता है, वहीं की स्थानीय आबादी को आज बिजली के लिए तरसना पड़ रहा है। गांवों में सूरज ढलते ही अंधेरा पसर जाता है, बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे, अस्पतालों में मरीज जनरेटर के भरोसे हैं, और छोटे कारोबारी रातों को दुकानों के शटर बंद करने को विवश हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह केवल एक प्रशासनिक असफलता नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक अन्याय है। हम कोयला दे सकते हैं तो रोशनी भी मांग सकते हैं, और अगर रोशनी नहीं देंगे तो कोयला भी नहीं मिलेगा, उन्होंने अपने शब्दों में जनाक्रोश की चेतावनी भर दी। मुन्ना ने आगे कहा कि यह समझने की ज़रूरत है कि बिजली अब केवल सुविधा नहीं रही, बल्कि जीवन, शिक्षा और रोज़गार का बुनियादी आधार बन चुकी है। जब देश के अन्य हिस्सों में 24 घंटे बिजली दी जा सकती है, तो झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र को यह हक़ क्यों नहीं दिया जाता? क्या सिर्फ इसलिए कि यहां की आवाज़ संसद की दीवारों तक नहीं पहुँचती? उन्होंने केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि अगर एक सप्ताह के भीतर बिजली की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो जनता कोयला परिवहन को रोकने पर बाध्य होगी। वहीं प्रेस वार्ता के दूसरे हिस्से में उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत झारखंड में अंगीभूत महाविद्यालयों से इंटरमीडिएट शिक्षा को हटाने के निर्णय की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न तो शिक्षा के अधिकार की भावना के अनुरूप है, न ही सामाजिक न्याय की अवधारणा के। दशकों से हजारीबाग के विद्यार्थी सरकारी कॉलेजों जैसे अन्नदा कॉलेज और के.बी. विमेन्स कॉलेज, इत्यादि पर निर्भर रहे हैं। अब इन कॉलेजों में इंटर नामांकन पर रोक लगाने से एक पूरी पीढ़ी को अकाल शिक्षाबंदी की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने विशेष चिंता हजारीबाग की बेटियों को लेकर जताई। के.बी. विमेन्स कॉलेज जैसा एकमात्र सरकारी महिला संस्थान जहां छात्राएँ सुरक्षित वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर रही थीं, अब प्रवेश की सीमाओं और संसाधनों की कमी से चरमराने लगा है। जब अन्य संस्थानों में प्रवेश ही बंद हो जाए, तो बेटियों के पास विकल्प ही क्या रह जाता है? क्या शिक्षा केवल उन तक पहुँचेगी जो बीस-पच्चीस हज़ार रुपये की निजी फीस दे सके। सिंह का मानना था कि नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन बगैर संसाधन, योजना और संक्रमणकालीन व्यवस्थाओं के किया गया, जिससे शिक्षा का दरवाज़ा उन वर्गों के लिए बंद हो गया जो पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। उन्होंने इसे शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा संकुचन कहा एक ऐसा कदम जो समावेशी शिक्षा की अवधारणा के विपरीत है। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे इस संकट की गंभीरता को समझते हुए हस्तक्षेप करें और आवश्यक कदम उठाएँ ताकि न केवल इंटरमीडिएट स्तर पर नामांकन की अस्थायी बहाली सुनिश्चित हो, बल्कि संसाधनों के अभाव से जूझ रहे कॉलेजों को सशक्त किया जा सके। उनकी यह भी मांग थी कि सरकारी कॉलेजों को दो पाली में चलाया जाए ताकि अधिक से अधिक छात्रों को समायोजित किया जा सके और बेटियों के लिए नए संस्थान खोले जाएँ। प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी नई शिक्षा नीति के सिद्धांतों का विरोध नहीं कर रही, बल्कि उसके अव्यवस्थित, अधकचरे और गरीब विरोधी क्रियान्वयन के खिलाफ आवाज उठा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और बिजली दोनों के अभाव में कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता।
मुख्य रूप से उपस्थित प्रदेश सचिव शशि मोहन सिंह प्रदेश प्रतिनिधि विरेन्द्र कुमार सिंह जिला मीडिया अध्यक्ष निसार खान महानगर अध्यक्ष मनोज नारायण भगत महासचिव ओमप्रकाश झा सहकारिता विभाग के अध्यक्ष कृष्णा किशोर प्रसाद महानगर महासचिव बबलू सिंह विक्की कुमार आदि उपस्थित थे ।