ग्रामीणों द्वारा शिक्षक के स्थानांतरण होने पर दी गई नम आंखों से भावभीनी विदाई सबके आंखों से छलके आंसू।
सबके चहेते थे विद्यालय के शिक्षक योगेश्वर चतुर्वेदी सात वर्षों में उन्होंने विद्यालय को दिया नया आयाम।
खबर जनपद बांदा के विकासखंड कमासिन अंतर्गत ग्राम पंचायत कुचौली के उच्च प्राथमिक विद्यालय कंपोजिट क्षेत्र कमासिन का है जहां पर 7 वर्षों से अपनी सेवा दे रहे शिक्षक योगेश्वर चतुर्वेदी का स्थानांतरण चित्रकूट के विकासखंड मानिकपुर के लक्ष्मणपुर गांव में शासनादेश द्वारा हो गया जैसे ही गांव वालों को इस बात की खबर चली कि हमारे गांव में तैनात शिक्षक का दूसरी जगह ट्रांसफर हो गया है तो पूरा गांव स्तब्ध हो गया क्योंकि उनके द्वारा जो बच्चों में शिक्षा के माध्यम से एक अनुशासनात्मक की भावना के साथ-साथ बच्चों को इतना प्यार दुलार देकर उन्होंने शिक्षा की नई ज्योति जलाई यहां तक की ग्रामीणों ने बताया कि वह गांव में जाकर घर-घर सभी छात्र/छात्राओं को एवं उनके अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करना एक अच्छे शिक्षक की भावना प्रकट करता है विदाई के समय विद्यालय को फूल गुब्बारों से सजाया गया एवं बच्चों के द्वारा सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रम के द्वारा सरस्वती मां की वंदना एवं विदाई गीत गाकर अपने गुरू जी को नम आंखों से विदा किया इसी दौरान गांव के संभ्रांत अभिभावकों ने उनको सम्मान उपहार देकर नम आंखों से विदा किया ग्राम प्रधान शेषनारायण शुक्ल एवं विद्यालय स्टाफ तथा बच्चों के द्वारा उन्हें उपहार देकर आशीर्वाद लिया शिक्षक योगेश्वर ने अपने संबोधन में कहा की एक शिक्षक केवल ज्ञान का स्रोत नहीं होता, बल्कि वह समाज के निर्माण की नींव भी होता है। विदाई के समय पूरा कुचौली गांव भावुक हो उठा कार्यक्रम में ग्रामीण बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं की उपस्थिति भारी रही, जो इस बात का प्रमाण था कि योगेश्वर चतुर्वेदी गांव के हर दिल में बसते हैं। वही विद्यालय के शिक्षक जयप्रकाश द्विवेदी, राम मोहन विश्वकर्मा, सुप्रसिद्ध भजन गायक शिवमोहन विश्वकर्मा, ने बताया कि चतुर्वेदी जी ने शिक्षा को सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया, उन्होंने अभिभावकों को जागरूक किया और गांव में शिक्षा के प्रति नई चेतना जगाई। उन्होंने बच्चों को केवल पाठ्यक्रम नहीं सिखाया, बल्कि संस्कार, अनुशासन और मानवीय मूल्य भी दिए। गांव के अभिभावकों ने कहा, ऐसे शिक्षक विरले ही होते हैं। उनका जाना गांव के लिए एक भावनात्मक क्षति है, लेकिन उनकी दी गई सीखें हमेशा प्रेरणा बनकर साथ रहेंगी। कार्यक्रम के अंत में योगेश्वर चतुर्वेदी ने भावुक स्वर में कहा, कुचौली गांव मेरा परिवार बन गया था। यहां के बच्चों की मासूम मुस्कान और गांव वालों का प्रेम मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा। इस मौके पर इच्छा विश्वकर्मा, प्रतिमा देवी,अंशिका, प्राची, गोलू आष्था,प्रिया,प्रतीक्षा, विकास, शिवम् आयुष, दिव्यांसी छात्र छात्राएं भावुक होकर भावभीनी विदाई दी वहीं धीरेन्द्र कुमार भारतीय,सहायक अध्यापको सहित समस्त ग्रामवासी मौजूद रहे |
बांदा से संवाददाता,
विनय सिंह की रिपोर्ट