नरेश सोनी
इंडियन टीवी न्यूज
ब्यूरो हजारीबाग।
सांसद मनीष जायसवाल ग्रामीणों के समर्थन में धरने पर बैठे, ऋत्विक कंपनी की कार्यशैली पर जताई कड़ी आपत्ति
चट्टीबरियातू कोल माइंस परियोजना में तालाब क्षति को लेकर बवाल
हजारीबाग/केरेडारी : एनटीपीसी की चट्टीबरियातू कोल माइंस परियोजना एक बार फिर विवादों की चपेट में आ गई है। आउटसोर्सिंग कंपनी ऋत्विक पर आरोप है कि उसने चट्टीबरियातू गांव के लातो आहर तालाब के मेढ़ को पोकलेन मशीन से काट दिया और ड्रिलिंग कर तालाब से पानी निकालने का प्रयास किया, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया।
सोमवार रात करीब 2 बजे यह घटना सामने आई, जब ग्रामीणों ने गुपचुप तरीके से हो रहे इस कार्य का विरोध किया। मौके पर मौजूद पोकलेन मशीन के चालक और अन्य कर्मी ग्रामीणों का विरोध देख फरार हो गए। ग्रामीणों ने मंगलवार सुबह इसकी सूचना सीधे हजारीबाग लोकसभा सांसद मनीष जायसवाल को दी।
सूचना मिलते ही सांसद जायसवाल घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे मामले का गंभीरता से निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों से विमर्श करने के उपरांत एनटीपीसी चट्टीबरियातू परियोजना प्रमुख सी.वी. नवीन से दूरभाष पर बात कर कंपनी की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक तालाब के काटे गए मेढ़ को पुनः भरा नहीं जाता और ड्रिलिंग को बंद नहीं किया जाता, तब तक वे ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे रहेंगे। सांसद ने कहा कि यह तालाब चट्टीबरियातू, नावाडीह, पगार, भुइयांटोली जैसे कई गांवों के लिए न केवल सिंचाई, बल्कि दैनिक उपयोग का एकमात्र जलस्रोत है। ऐसे में इस पर जबरन किसी भी तरह की छेड़छाड़ जनविरोधी कार्य है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने परियोजना प्रमुख को ग्रामीणों के साथ संवाद और सहमति के आधार पर काम करने की नसीहत दी।
धरने में सांसद के साथ सांसद प्रतिनिधि सत्येंद्र नारायण सिंह, मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी, बड़कागांव क्षेत्र के सांसद प्रतिनिधि पूनम साहू, भाजपा नेता जुगनू सिंह, जयनारायण मेहता, रंजीत मेहता, उपेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, प्रकाश गुप्ता, अमित गुप्ता, बालगोविंद सोनी, पंकज साहा, कंचन यादव सहित कई राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता, आजसू नेता, पंचायत प्रतिनिधि तथा सैकड़ों ग्रामीण शामिल रहे।
मुख्य बिंदु: कंपनी पर तालाब की मेढ़ काटने और अवैध ड्रिलिंग का आरोप
ग्रामीणों के विरोध पर मौके से कर्मचारी फरार
सांसद ने परियोजना प्रमुख से की सीधी बात, जताई नाराजगी
जब तक क्षति की भरपाई नहीं होती, धरना जारी रखने की चेतावनी
स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है, लेकिन सांसद की मौजूदगी से ग्रामीणों को बल मिला है और प्रशासन पर दबाव बना है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें।