ब्यूरो चीफ – राकेश मित्र जिला-कांकेर
शासकीय प्राथमिक शाला आवासपारा साल्हे में अध्ययनरत नन्हे-मुन्ने छात्र अपनी जान जोखिम में डालकर जर्जर भवन में शिक्षा प्राप्त करने को मजबूर हैं। राज्य सरकार भले ही शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू कर रही हो, शिक्षकों की पदस्थापना और वित्तीय सहायता भी जारी हो रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।विद्यालय का भवन पिछले कई वर्षों से उपयोग में है, लेकिन वर्तमान में इसकी स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि किसी भी क्षण बड़ी दुर्घटना घट सकती है। छत का मलबा लगातार नीचे गिर रहा है और पूरी छत एक ओर झुक चुकी है, जिससे स्पष्ट है कि भवन पूरी तरह असुरक्षित हो चुका है। इसके बावजूद यहां रोज़ाना बच्चे पढ़ाई करने आ रहे हैं।स्थानीय लोग और पालक वर्ग इस स्थिति को लेकर बेहद चिंतित हैं, परंतु संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। आशंका है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा।सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिन विद्यालयों की इमारतें ठीक-ठाक हैं, वहां मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि जिन भवनों को पूर्ण रूप से ध्वस्त कर पुनर्निर्माण की जरूरत है, उन्हें अनदेखा किया जा रहा है। यह लापरवाही कहीं न कहीं शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा दोनों के साथ खिलवाड़ है।स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से निवेदन है कि जल्द से जल्द इस विषय पर संज्ञान लेते हुए भवन निर्माण या स्थानांतरण की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की जान सुरक्षित रह सके।