नगर निगम के महापौर द्वारा दल नेता व संगठन के नगर अध्यक्ष द्वारा एक अन्य को दल नेता बनाये जाने के पश्चात संगठन और निगम के बीच की दूरिया मानो अब सड़को पर आने के लिये बेताब है, दो मोर्चो की यह लड़ाई अस्तित्व की है, वर्चस्व की है, आर्थिक है या किसी किसी को अपनी राजनीति चमकाने की है यह अघोषित रूप से सबको मालूम है परन्तु प्रत्यक्ष रूप से शायद शीघ्र ही समाज के पटल पर होने की संभावना है।
दूसरे मोर्चे की पटकथा प्रदेश के संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह के यहां बिजनोर जाते हुए बनी, दूसरी बैठक गुरुद्वारा रोड़ स्तिथ एक सिख समाज के नेता के कार्यालय पर हुई, अब तीसरी की सूचना अन्य दल से आये एक पूर्व विधायक के निवास पर एक या दो दिन में सम्भव?
सहारनपुर: भाजपा में स्थानीय स्तर पर मचे घमासान में अब प्रत्यक्ष रूप से दो गुट बन गए है आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी चल निकला है, चाहे सिमरन ड्राइविंग को लेकर हो, चाहे निगम के दल नेता के रूप में हो चाहे अपने अपने समर्थकों के द्वारा एक दूसरे के क्रियाकलापो की जानकारियों को समाज के बीच मे फैलाना हो? यह सब किसी भी लिहाज से शायद उपयुक्त नही है, पूर्व में भी इस बात की आशंकाएं थी कुछ अन्य दलों से आये व्यक्ति भाजपा में दल दल बढ़ाने का कार्य करेंगे शायद वही मानसिकता लेकर भाजपा में आये कुछ नेता अब दल दल की रणनीति पर कार्य कर रहे है, हालांकि ऐसी भी जानकारियां सूत्रों से प्राप्त हो रही है कि ऐसे नेता मौका देख कर पुनः अपने घर वापसी करेंगे, परन्तु दलगत राजनीति के तहत भाजपा में दल दल फैला कर, अब दूसरे मोर्चे की होने वाली बैठक में असंतुष्टों ओर विरोधियों का कुनबा कितना बढ़ेगा यह तो बैठक के बाद ही पता चलेगा परन्तु बैठक का मेजबान पुनः अपने समाज के ब्यक्तियो के सिर दिखाकर राजनीति अवश्य करने का प्रयास करेगा, हालांकि समाज एक प्रकार से अब ऐसे व्यक्ति के झांसे में आने वाला नही है,* वही संगठन में प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व पल पल की जानकारी अपने अपने सूत्रों से ले रहा है और मंथन ओर परिदृश्यता के सामंजस्य के बाद कुछ लोगो पर कार्यवाही भी हो सकती है, वही स्थानीय स्तर पर नेता भी आपसी खींचतान के चलते प्रदेश नेतृत्व के परिवर्तन का बेसब्री से इंतज़ार* कर रहे बताये जा रहे है, ऐसे में किस गुट का कितना प्रभाव होगा? यह तो प्रदेश नेतृत्व के परिवर्तन के बाद ही तय होगा? फिलहाल दोनों भाजपा के स्थानीय गुट अपनी अपनी रणनीति बनाने में मशगूल बताये जा रहे है। देखते है एक या दो दिन में दूसरे मोर्चे की बैठक एक अन्य दल के नेता के निवास पर होने के बाद क्या नया गुल खिलाती है? और किस किस नेता के विरुद्ध क्या रणनीति बनाई जाएगी? भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ता भी अब गुटो में बंटकर अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे है।?
आलोक अग्रवालृ
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रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़