नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज हजारीबाग
हजारीबाग: सिविल कोर्ट में शनिवार को मामलों के त्वरित निष्पादन व पक्षकारों की सुविधा के लिए एक इस वर्ष का तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया था। झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार आयोजित इस नेशनल लोक अदालत में सुलह के आधार पर कुल 70 हजार 392 मामलों का निष्पादन किया गया। जिसमें कुल 48 करोड़ 19 लाख 90 हजार 774 रुपए की राशि पर सहमति बनी। इस नेशनल लोक अदालत में कुल 70 हजार 405 मामलों को सुलह समझौता के लिए रखा गया था। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के बैनर तले आयोजित इस नेशनल लोक अदालत की अगुवाई प्रधान जिला जज रंजीत कुमार कर रहे थे। इस मौके पर कुटुंब न्यायाधीश अनुज कुमार, श्रम न्यायाधीश दिनेश राय, हजारीबाग बार संघ अध्यक्ष राजकुमार, हजारीबाग बार संघ सचिव सुमन कुमार सिंह मौजूद थे। इस मौके पर सभी न्यायिक पदाधिकारी, वकील, संबंधित विभाग के पदाधिकारी और पक्षकार भी मौजूद थे।
इस मौके पर प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने कहा कि लोक अदालत एक ऐसा वैकल्पिक मंच है जिसके माध्यम से सस्ता, सरल, सुलभ न्याय उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि लोक अदालत का शुभारंभ देश में सबसे पहले वर्ष 1982 में जूनागढ़ में हुआ था। उसके बाद इसका आयोजन वर्ष 1984 में महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने बताया कि लोक अदालत के जनक माननीय न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती थे। इसके बाद 1987 में जिला विधिक प्राधिकार की स्थापना हुई। और उसके बाद से लोक अदालत की प्रक्रिया अनवरत जारी है। लोक अदालत से न्यायालय पर मामलों का बोझ कम होता है। उन्होंने सभी से इसे ज्यादा-से-ज्यादा उपयोग में लाने की बात कही। मौके पर हजारीबाग बार संघ के अध्यक्ष राजकुमार और सचिव सुमन कुमार सिंह ने भी अपने विचार सभी के समक्ष रखे। और हजारीबाग बार संघ की ओर से हरसंभव सहयोग करने की बात कही।
मंच का संचालन न्यायिक पदाधिकारी अनुष्का जैन ने किया। जबकि धन्यवाद ज्ञापन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने दिया। प्रधान जिला जज रंजीत कुमार लोक अदालत के दौरान हरेक बेंच में जाकर मामलों का जायजा लिया और ज्यादा से ज्यादा मामलों के निष्पादन के लिए सभी का प्रोत्साहन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर सभी न्यायिक पदाधिकारियों और बार संघ सदस्यों की उपस्थिति में लोक अदालत की विधिवत घोषणा की।
इस लोक अदालत में बैंक रिकवरी के 726 मामले, सुलहनीय आपराधिक 387 मामले, बिजली के 367 मामले, भू-अर्जन के 561 मामले, श्रम विवाद से संबंधित 07 मामले, मोटर वाहन दुर्घटना दावा से संबंधित 10 मामले, वैवाहिक विवाद से संबंधित 46 मामले, सिविल प्रकृति के 26 मामले, पानी बिल व अन्य टैक्स से संबंधित 885 मामले, चेक बाउंस के 146 मामले, वित से संबंधित 160 मामले और अन्य 67 हजार 71 मामलों का निपटारा पक्षकारों की आपसी सहमति से किया गया। यह जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने दी। उन्होंने बताया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार के दिशा निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार लगातार लोगों की सुविधाओं के लिए काम कर रहा है। और इस तरह के कार्यक्रम हमेशा लगाए जाते रहेंगे। उन्होंने इस लोक अदालत में शामिल सभी न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, कोर्ट कर्मचारियों और पक्षकारों को प्रति अपना आभार जताया है।