✍राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी, विजयराघवगढ़ के जननायक संजय सत्येन्द्र पाठक — जनसेवा और विकास का पर्याय
(31 अक्टूबर जन्मदिवस पर विशेष)
मध्यप्रदेश की राजनीति में विजयराघवगढ़ विधानसभा का नाम जिस शख्सियत से जुड़कर एक पहचान बना चुका है, वह हैं — विधायक संजय सत्येन्द्र पाठक।
लगातार पांच बार से जनता का विश्वास और प्रेम अर्जित कर रहे श्री पाठक ने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाते हुए स्वयं को क्षेत्र का “प्रधानसेवक” घोषित ही नहीं बल्कि सिद्ध किया है।संजय पाठक का जीवन जनसेवा और विकास की अनवरत साधना है।गरीब, पीड़ित और वंचित वर्ग की सहायता हो या क्षेत्र के विकास का कोई बड़ा सपना संजू भैया सदैव सबसे आगे दिखाई देते हैं। उनका सामाजिक सरोकार केवल भाषणों में नहीं, बल्कि हर संकट और हर सुख-दुख की घड़ी में जनता के बीच उपस्थित रहकर झलकता है।
सेवा की विरासत और कर्मयोग का प्रतीक
संजय पाठक अपने पिता, पूर्व मंत्री एवं समाजसेवी कर्मयोगी स्व. सत्येन्द्र पाठक जी, माता पूर्व महापौर श्रीमती निर्मला पाठक जी की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। पिता की तरह ही उन्होंने समाजसेवा को जीवन का मूल मंत्र बनाया है। आज भी क्षेत्र के लोग स्व. सत्येन्द्र पाठक जी को एक कर्मयोगी के रूप में याद करते हैं और वही समर्पण अब उनके सुपुत्र संजय पाठक में दिखाई देता है।
शिक्षा और युवा उत्थान के प्रेरक
शिक्षा के क्षेत्र में श्री पाठक का योगदान अद्वितीय है। सायना कॉलेज की स्थापना के माध्यम से उन्होंने न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक मिसाल कायम की है। सायना कॉलेज आज युवाओं के सपनों को साकार करने का केन्द्र बन चुका है।
धार्मिक और सांस्कृतिक समर्पण
संजय पाठक ने धर्म और संस्कृति को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। उनका सपना “हरिहर तीर्थ” क्षेत्र, विजयराघवगढ़ साकार होने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। यहां भारत के प्रमुख तीर्थों के प्रतीक स्थलों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जो भविष्य में विजयराघवगढ़ को एक प्रमुख सनातन तीर्थस्थल के रूप में स्थापित करेगा। राजा सरयू प्रसाद की इस प्राचीन नगरी को उसके ऐतिहासिक महत्व के साथ नई पहचान देगी। इस परियोजना के माध्यम से न केवल विजयराघवगढ़ की पहचान पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त होगी, बल्कि आसपास के ग्रामीणों को स्वरोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। स्थानीय उत्पाद, लोक संस्कृति और परंपराओं को भी इस गतिविधियों में समाहित करने की योजना है, जिससे यह परियोजना “इको-फ्रेंडली विकास मॉडल” के रूप में स्थापित होगी।
पर्यावरण संरक्षण की सजीव प्रेरणा
संजय पाठक का मानना है कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि यह हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। नेचर रिसॉर्ट परिसर के जरिये जल संरक्षण, सौर ऊर्जा, जैविक खेती और वृक्षारोपण जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से जंगल स्थल पर्यावरणीय संतुलन का सजीव उदाहरण बनेगा। लिहाजा कल्पना अनुरूप अपने पैतृक गांव बिरुहली में “निर्मलछाया नेचर रिसॉर्ट” की कल्पना को साकार किया। नेचर रिसॉर्ट की कल्पना श्री पाठक की उस सोच का विस्तार है जिसमें वे हर विकास कार्य को मानवता, पर्यावरण और संस्कृति के त्रिकोण में देखते हैं
सामाजिक उत्तरदायित्व और जनकल्याण
गरीब कन्याओं के विवाह, जरूरतमंदों की चिकित्सा सहायता और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी हर पहल में श्री पाठक की भूमिका प्रेरणादायक रही है। अपने स्वर्गीय पिता के नाम पर उन्होंने “सत्येन्द्र पाठक अस्पताल” की स्थापना का संकल्प लिया है, जो शीघ्र ही क्षेत्र की जनता को समर्पित होगा।
विकास और उद्योग में अग्रणी
राजनीति के साथ-साथ श्री पाठक प्रदेश के युवा उद्योगपति के रूप में भी जाने जाते हैं। उनका औद्योगिक योगदान प्रदेश के आर्थिक विकास में सहभागिता करता है और कटनी जिले को गौरव प्रदान करता है। औधोगिक प्रगति में श्री संजय पाठक के पुत्र यश का योगदान अहम है श्री संजय पाठक की तरह यश कटनी को औधोगिक क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।
विकास का अर्थ केवल सड़कें, इमारतें और उद्योग नहीं, बल्कि एक संतुलित तंत्र विजयराघवगढ़ विधायक संजय सत्येन्द्र पाठक न केवल विकास और जनसेवा के पर्याय हैं, बल्कि प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी सोच भी अद्वितीय है।उनकी कल्पना में विकास का अर्थ केवल सड़कें, इमारतें और उद्योग नहीं, बल्कि ऐसा संतुलित तंत्र है जिसमें प्रकृति, पर्यटन और स्थानीय संस्कृति का संरक्षण समान रूप से जुड़ा हो।इसी दृष्टिकोण का साकार रूप है उनका सपना न सिर्फ विजयराघवगढ़ क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को जीवंत करेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार, पर्यटन और पर्यावरणीय जागरूकता का भी केंद्र बनेगा।
जनप्रियता का प्रतीक – “संजू भैया”
संजय पाठक सिर्फ एक विधायक नहीं, बल्कि आम जनता के अपने “संजू भैया” हैं। वे जनसेवक से बढ़कर एक भाई, मित्र और सहायक के रूप में पहचाने जाते हैं। क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में उनकी उपस्थिति ने उन्हें जनमानस का प्रिय बना दिया है।
जन्मदिन 31 अक्टूबर के इस पावन दिवस पर विजयराघवगढ़ की धरती अपने कर्मयोगी जननायक श्री संजय सत्येन्द्र पाठक जी के जन्मदिवस पर उन्हें शुभकामनाएं अर्पित करती है। उनकी दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और जनसेवा की यह प्रेरक यात्रा यूं ही अनवरत चलती रहे यही कामना है।
“संजू भैया – जनता के सेवक, विकास के शिल्पकार।”
🌸 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं! 🌸
आशुतोष शुक्ला