दुद्धी सोनभद्र(विवेक सिंह)।
दारुल उलूम कादरिया नूरिया बघाडू में बुधवार दोपहर दस्तारबंदी का वार्षिक जलसा धूमधाम से संपन्न हुआ। इस दौरान 10 आलिम, 12 कारी और 5 हिफ्ज छात्रों को दस्तार पहनाकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में रूहानी तकरीरें, नातिया शायरी और कव्वालियां पेश की गईं। प्रयागराज से खतीबुल हिंद मौलाना कार्जिए शहर ने कहा कि इस्लाम सबसे पुराना धर्म है, जिसकी शुरुआत हजरत आदम अलैहिस्सलाम से हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस्लाम सच्चाई का मजहब है, जिस पर चलकर इंसान बेहतर जीवन जी सकता है।मुबारकपुर, आजमगढ़ से आए मौलाना मसूद अहमद बरकानी ने गुनाहों से बचने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि इससे याददाश्त भी मजबूत होती है। नातिया शायर हजरत अख्तर काशिफ ने पैगंबर साहब की शान में बेहतरीन नात पेश की।
मुख्य अतिथि हजरत अजीज मिल्लत ने मुल्क की सलामती व अमन के लिए दुआएं कीं। जलसे की सदारत अल्लामा मौलाना मोहम्मद नसीरुद्दीन (नासिर मिल्लत) ने की, जबकि संचालन मौलाना तबीब आलम ने किया।
इस मौके पर संस्था के नायब सरबराह मौलाना मसूद, मुक्ति मोहम्मद, नजरुल कादरी, प्रबंधक मोहम्मद हसनैन, सादिक हुसैन, नरेंद्र सिंह गौड़, जुबेर आलम, मुजीब अहमद, कौनैन अली, रिजवान अहमद, जोहर खान, मन्नू खान, कलीमुल्लाह खान, अनवर अहमद, अब्दुल रशीद, मौलाना सलाउद्दीन समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पीएससी के जवान तैनात रहे।