फतेहगंज पश्चिमी। एक ओर सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर फतेहगंज पश्चिमी का सरकारी अस्पताल तक पहुंचने वाला रास्ता इन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। अस्पताल को जोड़ने वाली मुख्य सड़क इस कदर जर्जर हो चुकी है कि यहां से गुजरना किसी खतरे से कम नहीं रह गया है। गहरे गड्ढे, उनमें भरा गंदा पानी और फिसलन मरीजों, तीमारदारों और एम्बुलेंस के लिए भारी मुसीबत बन चुके हैं।
बारिश के बाद हालात और भी भयावह हो जाते हैं। सड़क गड्ढों में तब्दील हो जाती है, जिससे दोपहिया वाहन सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं और चारपहिया वाहन अक्सर फंस जाते हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति तब बनती है, जब किसी गंभीर मरीज को लेकर एम्बुलेंस को इसी रास्ते से अस्पताल पहुंचना पड़ता है। कई बार गड्ढों और जलभराव के कारण एम्बुलेंस की रफ्तार थम जाती है, जिससे मरीज की जान पर सीधा खतरा मंडराने लगता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। सड़क की बदहाली को लेकर कई बार जिम्मेदार विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। लोगों में गुस्सा इस बात को लेकर है कि यह सड़क आम रास्ता नहीं, बल्कि अस्पताल तक पहुंचने का एकमात्र प्रमुख मार्ग है, जहां से रोजाना सैकड़ों मरीज और एम्बुलेंस गुजरती हैं।
राहगीरों और दुकानदारों के अनुसार, रात के समय सड़क और भी खतरनाक हो जाती है। अंधेरे में गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
इस पूरे मामले पर सीएचसी प्रभारी डॉ. संचित शर्मा ने बताया कि अस्पताल की इस सड़क समेत कई आवश्यक कार्यों की मरम्मत के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी को लिखित रूप से मांग भेजी जा चुकी है। हालांकि धरातल पर अब तक किसी तरह का सुधार नजर नहीं आया है।
क्षेत्रवासियों की मांग है कि इस सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए, ताकि मरीजों को इलाज तक पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक आंखें मूंदे रहता है, या फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही नींद से जागेगा।
प्रवन पाण्डेय ITN National जिला संवाददाता बरेली