बरेली। रबड़ फैक्टरी के पीड़ित मजदूरों का दर्द अब आक्रोश में बदलता नजर आ रहा है। 27 वर्षों से न्याय और वैधानिक भुगतान के लिए भटक रहे हजारों मजदूरों की उम्मीदों पर एक बार फिर तारीख की चोट पड़ी है। बुधवार को रामपुर गार्डन, बरेली में आयोजित रबड़ फैक्टरी विलंबित भुगतान संघर्ष कोर कमेटी की बैठक में प्रशासन और शासन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली गई।
बैठक को संबोधित करते हुए श्रमिक नेता अशोक कुमार मिश्रा ने बताया कि बुधवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट (सिविल) में फैक्ट्री की जमीन से जुड़े मामले में आदेश आना था, लेकिन कोर्ट के वैंकेंट होने के चलते केस फाइल दूसरी अदालत में ट्रांसफर कर दी गई। अब अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी। मजदूरों ने इसे न्याय में जानबूझकर की जा रही देरी करार दिया।
अशोक मिश्रा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इतने संवेदनशील और ऐतिहासिक मामले में शासन और प्रशासन की ओर से गंभीर पैरवी नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि बरेली के शासकीय अधिवक्ता ने स्वयं अदालत में उपस्थित होने के बजाय जूनियर अधिवक्ता से पैरवी कराई, जो इस बात का साफ संकेत है कि मजदूरों के न्याय को हल्के में लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य मामला नहीं, बल्कि 27 साल से शोषित रबड़ फैक्टरी मजदूरों के भविष्य और उनके परिवारों के जीवन-मरण का सवाल है। प्रशासन इस मामले की गंभीरता से पूरी तरह अवगत है, इसके बावजूद लगातार उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है, जिससे हजारों मजदूर गहरे आहत और निराश हैं।
बैठक में यह भी खुलासा किया गया कि पिछले मात्र 20 दिनों में तीन कर्मचारियों—राजेन्द्र प्रसाद, एस.के. गोयल और अजय वर्मा—की असमय मौत हो चुकी है। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से बकाया भुगतान न मिलने, आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव ने मजदूरों की जान लेना शुरू कर दिया है। सवाल उठाया गया कि क्या प्रशासन और शासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहे हैं?
मजदूर नेताओं ने याद दिलाया कि प्रतिनिधिमंडल द्वारा पहले ही मंडलायुक्त बरेली और जिलाधिकारी बरेली को एक ठोस प्रस्ताव सौंपा गया था। प्रस्ताव में कहा गया था कि फतेहगंज पश्चिमी में प्रस्तावित बरेली विकास प्राधिकरण की औद्योगिक टाउनशिप योजना के तहत अधिग्रहण की जाने वाली 125 हेक्टेयर भूमि में रबड़ फैक्टरी की निष्प्रायोजित, खाली पड़ी जमीन का उपयोग किया जाए और इससे मिलने वाले अनुमानित 250 करोड़ रुपये के अधिग्रहण मुआवजे से पीड़ित मजदूरों का वैधानिक भुगतान तुरंत कराया जाए।
मजदूर नेताओं का आरोप है कि इस प्रस्ताव पर प्रशासन ने सहमति और आश्वासन तो दिया, लेकिन आज तक ज़मीन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आश्वासनों की फाइलें मोटी होती गईं और मजदूरों की हालत बद से बदतर होती चली गई।
अशोक कुमार मिश्रा ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने अब भी मजदूरों के हितों की रक्षा नहीं की और उपेक्षापूर्ण रवैया जारी रखा, तो मजदूर एक बड़े और निर्णायक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सड़क से लेकर कार्यालयों तक संघर्ष तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
बैठक में मौजूद मजदूरों ने एक स्वर में कहा कि अब सिर्फ तारीख नहीं, न्याय चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि पीड़ित मजदूरों की लगातार हो रही मौतों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया जाए और वर्षों से लंबित वैधानिक भुगतान कराया जाए।
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमोद कुमार, आर.सी. शर्मा, प्रदीप रस्तोगी, घनश्याम, राजीव पाठक, एस.एन. चौबे, एस.सी. निगम, अजय भटनागर सहित कई वरिष्ठ कर्मचारी, मजदूर नेता और पीड़ित श्रमिक मौजूद रहे।
प्रवन पाण्डेय ITN National जिला संवाददाता बरेली