दुद्धी सोनभद्र(विवेक सिंह)।
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर कस्बे के शिवाला से भगवान शंकर की भव्य शिव बारात निकली। बारात में भूत-पिशाच, नर-नारी समेत सैकड़ों श्रद्धालु डीजे की धुन पर झूमते-नाचते 2 किमी की यात्रा तय कर मल्देवा गांव के कैलाश कुंज द्वार पहुंचे।
बारात का भव्य स्वागत करने के बाद भगवान शिव का माता पार्वती संग वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न हुआ। पंडित महेंद्र मिश्रा ने पूर्ण विधि-विधान से विवाह कराया। जयमाला पहनाते ही पूरा मंदिर प्रांगण ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष से गूंज उठा।
वहीं बीड़र गांव के डीहवार धाम से बैलगाड़ी पर सवार भगवान भोलेनाथ की बारात लौवा नदी किनारे हिरेश्वरनाथ मंदिर पहुंची। सैकड़ों शिवभक्त नाचते-गाते शामिल हुए, जहां वधू पक्ष ने जोरदार स्वागत किया। विवाह के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए और भंडारे में प्रसाद वितरित किया गया।
कस्बे शिवालय बारात में वर पक्ष से रामलीला कमेटी अध्यक्ष कन्हैयालाल अग्रहरि, रामेश्वर राय, सचिव सुरेंद्र गुप्ता, पंकज अग्रहरि, उमेश चंद्र एडवोकेट, नाजू अग्रहरि प्रमुख रहे। वधू पक्ष से डॉ. लवकुश प्रजापति, तारा देवी, डॉ. हर्षवर्धन प्रजापति, सुनैना प्रजापति, डॉ. जयवर्धन प्रजापति, डॉ. प्रीति, कुलभूषण पांडेय, ग्राम प्रधान सीता जायसवाल व निरंजन जायसवाल ने स्वागत किया।
बीड़र बारात में बृजकिशोर कुशवाहा, निरंजन पटेल, विनय बैगा, पवन कुमार पटेल, रमेश बाबा, विजय कुशवाहा, शंभू नारायण शामिल रहे। वधू पक्ष से रविंद्र जायसवाल, राखी जायसवाल, बालकृष्ण जायसवाल, वर्षा रानी, आनंद जायसवाल, पंकज जायसवाल, कन्हैया लाल जायसवाल, रमेश जायसवाल, नीरज जायसवाल ने स्वागत किया।
इससे पूर्व सुबह से कस्बे के सभी शिवमंदिरों में श्रद्धालुओं ने दुग्धाभिषेक, जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, शहद, बेर, चने की झाड़ी, गेहूं की बाली, इत्र, चंदन, अक्षत अर्पित कर घी के दीप जलाए। सभी ने परिवार व लोक कल्याण की कामना की। प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार सिंह, महिला थाना प्रभारी संतु सरोज, कस्बा इंचार्ज हरिकेश राम के नेतृत्व में पुलिस व पीएसी ने सुरक्षा व ट्रैफिक व्यवस्था संभाली।
कैलाश कुंज मल्देवा व लौवा नदी मेले में रंग-बिरंगे खिलौने, चाट-पकौड़े, मिठाई, आइसक्रीम की दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ी। बच्चों व श्रद्धालुओं ने जमकर लुत्फ उठाया। शिवबारात में बारातियों को खीर व पानी का प्रसाद वितरित किया गया। संकट मोचन मंदिर पर शिवभक्तों ने ठंडई की व्यवस्था की, जिसका श्रद्धालुओं ने भरपूर आनंद लिया।