जाकिर झंकार | आहवा
आचार्य देवव्रत ने ऐतिहासिक ‘डांग दरबार’ के अवसर पर डांग के पूर्व राजवी परिवारों की वीरता और राष्ट्रभक्ति को नमन करते हुए उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए होली पर्व की शुभकामनाएँ भी दीं।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने रामायणकालीन दंडकारण्य से जुड़े डांग क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, प्रकृति-प्रेम, पारंपरिक कला और जीवनशैली को जानने का अनमोल अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि डांग दरबार देश की शौर्यगाथाओं और आदिवासी गौरव को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लेकर आदिवासी समाज के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन शुरू किया गया है, जिसके तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। पूरे गुजरात में प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने का अभियान चल रहा है। राज्य सरकार ने 500 गाँवों को प्राकृतिक गाँव बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, ताकि किसानों और नागरिकों को विषमुक्त भोजन मिल सके और स्वस्थ समाज का निर्माण हो।
रासायनिक खेती के दुष्परिणामों पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यूरिया, डीएपी और रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता घट रही है और लाभकारी जीवाणु नष्ट हो रहे हैं। इसके कारण गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में भूमि खेती के योग्य नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती ही स्वच्छ और निरोग जीवन का एकमात्र उपाय है। डांग जिला इस दिशा में देश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है।
वांसुर्णा के राजवी श्री धनराजसिंह चंद्रसिंह सूर्यवंशी ने राज्यपाल के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सरकार द्वारा राजवी परंपरा को सम्मान देने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने डांग के जंगलों और प्रकृति संरक्षण पर बल देते हुए स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम की शुरुआत में जिला कलेक्टर सुश्री शालिनी दुहान ने अतिथियों का स्वागत किया और बताया कि ब्रिटिश काल से 1842 से डांग के राजाओं को राजनीतिक पेंशन दी जा रही है, जो आज भी जारी है। 26 फरवरी से प्रारंभ हुए डांग दरबार मेले में डांग सहित वलसाड, नवसारी, तापी तथा महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए हैं।
मेले में 45 से अधिक सखी मंडलों के स्टॉल लगाए गए हैं, जहाँ महिलाओं द्वारा स्वदेशी उत्पादों की बिक्री की जा रही है। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम, जनजातीय लोकनृत्य, हरियाणवी घूमर नृत्य, प्रदर्शनी, स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता अभियान, पेयजल एवं सुरक्षा व्यवस्था सहित अनेक गतिविधियाँ आयोजित की गईं।
समारोह में वांसुर्णा राजवी ने राज्यपाल को धनुष-बाण एवं साफा पहनाकर सम्मानित किया तथा ‘भील योद्धाओं’ पर आधारित पुस्तक भेंट की। जिला प्रशासन की ओर से वारली पेंटिंग और तारपा भेंट किए गए। राज्यपाल ने डांग के पाँच राजवी परिवारों को पान-सुपारी, शाल, स्मृति-चिन्ह, स्वर्ण मुद्रा और राजनीतिक पेंशन प्रदान की।
वर्ष 2026 के लिए पाँच राजवी परिवारों सहित नौ नायकों और भाऊबंधों को कुल 67,74,278 रुपये की वार्षिक राजनीतिक पेंशन प्रदान की गई।
आहवा के रंग उपवन में आयोजित इस समारोह में डांगी आदिवासी लोकनृत्य और हरियाणवी घूमर नृत्य प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण, गणमान्य नागरिक, कलाकार, मीडिया प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।