झाकिर झंकार : आहवा
सशक्त महिला से ही सशक्त परिवार और सशक्त समाज का निर्माण संभव है। इस विचार को साकार करती कई प्रेरक कहानियाँ आज डांग जैसे आदिवासी क्षेत्र से सामने आ रही हैं। राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण हेतु चलाई जा रही मिशन मंगलम योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए आय और आत्मविश्वास का मजबूत आधार बनी है। डांग जिले के दगडपाड़ा गाँव की सुंदर मिशन मंगलम सखी मंडल इसकी जीवंत मिसाल है।
वर्ष 2019 में केवल 10 महिलाओं के साथ शुरू हुए इस सखी मंडल ने छोटी बचत और पारंपरिक हुनर को व्यवसाय का रूप दिया है। मंडल की महिलाएँ लालकड़ा चावल, नागली और नागली का आटा, उड़द दाल, नागली के पापड़, बिस्किट, उड़द दाल का आटा, हरी मिर्च, बांस का अचार तथा आयुर्वेदिक तरीके से तैयार की गई डांगी चटनी जैसी वस्तुएँ बनाती हैं। इसके साथ ही वे बांस के आभूषण बनाकर भी बिक्री करती हैं।
मिशन मंगलम योजना के अंतर्गत सुंदर सखी मंडल को ₹30 हजार का रिवॉल्विंग फंड प्राप्त हुआ, जिससे कच्चा माल खरीदने, पैकेजिंग करने और उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिली। इस सहयोग से महिलाएँ घर की सीमाओं से बाहर निकलकर बाजार तक पहुँचने में सफल हुई हैं।
मंडल की सक्रिय सदस्य रसिलाबेन मनोजभाई वलवी बताती हैं, “पहले हम केवल घर के काम तक सीमित थीं। आज सखी मंडल के माध्यम से पारंपरिक खाद्य पदार्थ बनाकर बेचते हैं और प्रति माह औसतन ₹15 हजार की आय अर्जित कर रहे हैं।”
हाल ही में डांग दरबार में लगाए गए स्टॉल के माध्यम से सुंदर सखी मंडल की महिलाएँ अपने हाथों से तैयार खाद्य पदार्थों और बांस के आभूषणों की सफल बिक्री कर रही हैं। स्थानीय स्वाद और आयुर्वेदिक गुणवत्ता के कारण उनके उत्पादों को लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।
उल्लेखनीय है कि छोटी बचत से शुरू हुई यह पहल आज महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक पहचान और आत्मसम्मान की नई दिशा दे रही है। आदिवासी परंपरा और सामूहिक प्रयास से खड़ा हुआ सुंदर सखी मंडल का स्वरोजगार मॉडल अन्य गाँवों की महिलाओं के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत बन रहा है।