रिपोर्टर:
जाकिर झंकार : आहवा, डांग
गुंदा के मौर में भरपूर पोषक तत्व, स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक पारंपरिक आहार डांग जिले के जंगल क्षेत्रों में गर्मियों की शुरुआत के साथ गुंदा के पेड़ों पर लगने वाले गुंदा के मौर आदिवासी समाज के लिए प्राकृतिक वरदान माने जाते हैं। जंगल पर आधारित जीवन जीने वाले डांग के आदिवासी परिवारों के लिए गुंदा के मौर वर्षों से पारंपरिक और पौष्टिक आहार के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
डांग जिले के कई गांवों में आदिवासी लोग गुंदा के पेड़ों पर लगने वाले कच्चे मौर को इकट्ठा कर उन्हें उबालकर या सब्जी बनाकर भोजन में उपयोग करते हैं। कुछ क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल कचूमर या अन्य पारंपरिक व्यंजनों में भी किया जाता है। गर्मियों के मौसम में यह प्राकृतिक भोजन शरीर को ताजगी और ठंडक देने के कारण लोगों में काफी लोकप्रिय है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से भी गुंदा के मौर बहुत लाभदायक माने जाते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है और पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है। इसके अलावा इसमें विटामिन C और A जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।
गुंदा के मौर में कैल्शियम और आयरन भी मौजूद होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने और शरीर में खून की मात्रा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही इसमें पोटैशियम भी पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक होता है।
प्रकृति की गोद में रहने वाले डांग के आदिवासी समाज के लिए जंगल से मिलने वाले ऐसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ जीवन का अहम हिस्सा हैं। गुंदा के मौर जैसी पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक भेंट गर्मियों के मौसम में आदिवासी परिवारों को पोषण और स्वास्थ्य दोनों प्रदान करती है।