उम्मेद जोया नाडोल पाली
नई दिल्ली। सांसद नीरज डाँगी ने शून्यकाल के दौरान देशभर में होने वाली बी या कोई वीवीआईपी नेता की जनसभाओं हेतु करोड़ों रुपये खर्च कर अस्थाई मंच, पंडाल, टेंट, माईक, बैरिकेटिंग, शौचालय, पानी और सुरक्षा इंतजामों पर बार-बार एक ही स्थान पर करोड़ों पय किये जाने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने सदन में कहा कि इसके लिये केन्द्र सरकार को – राष्ट्रीय नीति बनाई जाकर ऐसे बहुउद्देशीय स्थलों की स्थापना की जानी चाहिए, जिससे न नपव्यय रोका जा सकेगा, बल्कि भविष्य में सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्था अधिक पारदर्शी, एवं टिकाऊ हो सकेगी।
नीरज डाँगी ने कहा कि हर बार जब प्रधानमंत्री या कोई वीवीआईपी नेता किसी जिले या जनसभा करते हैं, तो प्रशासनिक अमला महीनों पहले से तैयारी में जुट जाता है। करोड़ों रुपये मंच, पंडाल, टेंट, लाइट, ध्वनि व्यवस्था, बैरिकेडिंग, शौचालय, पानी और सुरक्षा इंतजामों पर र दिए जाते हैं, वो भी एक दिन के कार्यक्रम के लिए और कार्यक्रम समाप्त होते ही ये सारी एं हटाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक कार्यक्रम की बात नहीं है, देशभर में हर साल वीवीआईपी सभाएं होती हैं, जिनमें से कई बार एक ही मैदान या स्थल बार-बार उपयोग में । लेकिन फिर भी हर बार करोड़ों रुपये अस्थायी ढांचे खड़े करने में खर्च हो जाते हैं।
डाँगी ने बताया कि जब बार-बार एक ही स्थान पर कार्यक्रम होते हैं, तो क्या वहाँ स्थायी क्यों नहीं बनाई जा सकतीं? ये स्थायी ढांचे/ संरचनाएं एक व्यावहारिक समाधान है। प्रायः यह क्या है कि प्रमुख जिलों में बार-बार एक ही मैदान या स्थान पर कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जहाँ बायी मंच, वीआईपी गैलरी, दर्शक दीर्घा, सुरक्षा दीवारें, विद्युत एवं ध्वनि व्यवस्था, शौचालय, जल क्षा प्रबंधन जैसी सुविधाओ की पूर्व से ही स्थायी व्यवस्था कर दी जाए, तो न केवल बड़ी मात्रा में धन की बचत हो सकती है, बल्कि आयोजन की गुणवत्ता, प्रशासनिक प्रबंधन एवं सुरक्षा भी अधिक सुदृढ हो सकती है।
नीरज डाँगी ने अपने सुझाव के तहत बताया कि स्थायी संरचनाएं सिर्फ प्रधानमंत्री या प्पी की सभाओं के लिए ही नहीं, बल्कि जनहित के अन्य आयोजनों में बहुपयोगी साबित हो हैं जैसे-सांस्कृतिक कार्यक्रम, धार्मिक आयोजन, प्रवचन, खेल प्रतियोगिता, स्थानीय चुनाव, आदि पयोग में लाई जा सकती हैं। कुछ राज्य सरकारों ने इस दिशा में प्रारंभिक कदम जरूर उठाए कन अभी तक इसे एक राष्ट्रीय नीति के रूप में नहीं अपनाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है स्तर पर समन्वित योजना बनाकर देशभर में ऐसे बहुउद्देशीय स्थलों की स्थापना की जानी
उन्होंने सदन में बताया कि एक ओर जहां देश डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटीज़ की बात है, वहीं दूसरी ओर वीवीआईपी सभाओं के लिए हर बार अस्थायी टेंट लगाने पर करोड़ों रुपये रना संसाधनों की बर्बादी नहीं तो और क्या है? अब वक्त आ गया है कि हम अस्थायी से स्थायी बढ़ें, ताकि सार्वजनिक धन की बचत हो, आयोजनों की गरिमा बनी रहे और देश की योजनाएं बनें।
डाँगी ने केन्द्र सरकार से मांग की कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय एवं राज्य एक समन्वित योजना बनाई जानी चाहिए, जिससे न केवल अपव्यय रोका जा सके, बल्कि में सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सुरक्षित एवं टिकाऊ हो सकेगी।
(ओमप्रकाश शर्मा)
निजी सचिव
माननीय सांसद (राज्य सभा) नीरज