इंडियन टीवी न्यूज़ रिपोर्टर राजेंद्र प्रसाद यादव चिचोली बैतूल
बैतूल।शाहपुर जनपद पंचायत क्षेत्र में इन दिनों “सरपंच पति राज” को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। महिला आरक्षण के तहत चुनी गई महिला सरपंचों के स्थान पर उनके पति ही पंचायत के अधिकांश कार्यों में हस्तक्षेप करते नजर आ रहे हैं, जिससे आरक्षण की मूल भावना पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कई ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच केवल नाम मात्र की भूमिका निभा रही हैं, जबकि वास्तविक निर्णय उनके पति ले रहे हैं। पंचायत के कार्यों की योजना, निर्माण कार्यों की निगरानी, भुगतान प्रक्रिया सहित अन्य प्रशासनिक गतिविधियों में सरपंच पतियों की सक्रिय भूमिका देखी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किए गए आरक्षण का लाभ वास्तविक रूप से महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे न केवल शासन की मंशा प्रभावित हो रही है, बल्कि पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।
जनपद पंचायत शाहपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत ढुमका रैय्यत और भी अन्य पंचायत कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां सरपंच पति खुलेआम बैठकों में भाग लेते हैं और निर्णयों को प्रभावित करते हैं। इस स्थिति को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि महिला आरक्षण की भावना के अनुरूप वास्तविक रूप से महिलाओं को अधिकार मिल सके और पंचायतों में पारदर्शिता बनी रहे।