राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी। नगर निगम सीमा के भीतर बहने वाली पांच प्रमुख नदियां—कटनी, कुठला, माई जी, निवार और रपटा—आज बदहाली के दौर से गुजर रही हैं। कभी शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली ये नदियां अब गंदगी, अतिक्रमण और उपेक्षा का शिकार बनती जा रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि—चाहे विधायक हों, सांसद, महापौर, पार्षद या विपक्ष—इन नदियों की दुर्दशा को नजरअंदाज कर रहे हैं। रोजाना इन नदियों के पुलों से गुजरने के बावजूद इनके संरक्षण और सफाई को लेकर कोई ठोस पहल नजर नहीं आती।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन नदियों के संरक्षण के लिए व्यापक योजना नहीं बनाई गई, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। नदियों में बढ़ता प्रदूषण न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि शहर के जलस्त्रोतों और जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
हालांकि, यह भी एक सच्चाई है कि नदियों में फैल रही गंदगी के लिए कहीं न कहीं आम नागरिक भी जिम्मेदार हैं। कचरा और अपशिष्ट पदार्थों का सीधे नदियों में प्रवाह स्थिति को और बिगाड़ रहा है।
अब जरूरत है सामूहिक प्रयास की—जहां प्रशासन, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक मिलकर इन नदियों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाएं। शहरवासियों से अपील की जा रही है कि वे नदियों को स्वच्छ रखने के लिए जागरूक बनें और इस दिशा में आवाज उठाएं, ताकि कटनी की जीवनधारा को बचाया जा सके।