नरेश सोनी ब्यूरो प्रमुख हजारीबाग।
हजारीबाग
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) झारखंड के निर्देशानुसार, हजारीबाग जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में 4 मई से 10 मई तक आयोजित ‘अग्नि सुरक्षा सप्ताह’ का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन के अवसर पर सिविल सर्जन कार्यालय सभागार में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने की।
गर्मी के मौसम में बढ़ता खतरा और बचाव के उपाय
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि गर्मी के महीनों में अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसे रोकने के लिए जिले के सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में समय-समय पर Fire Audit और विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराना अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिया कि भारत सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्गत Do’s and Don’ts का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए।
प्रायोगिक प्रशिक्षण: आग पर काबू पाने की दी गई ट्रेनिंग
इस अवसर पर मुख्य प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित जिला अग्निशमन पदाधिकारी शैलेंद्र किशोर ने स्वास्थ्य कर्मियों को तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि:
विद्युत लोड बढ़ने से ओवरहीट होकर सर्किट क्षतिग्रस्त होने की संभावना रहती है।
अस्पतालों को केवल फायर एनओसी (NOC) पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि निरंतर अंतराल पर सेफ्टी ऑडिट कराना चाहिए।
कार्यशाला के दौरान कर्मियों को प्रायोगिक प्रशिक्षण (Practical Drill) दिया गया, जिसमें आग लगाकर उसे बुझाने के सही तरीकों का प्रदर्शन किया गया।
डिजिटल मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग
सिविल सर्जन ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों (MOIC) और अनुमंडलीय अस्पताल बरही के उपाधीक्षक को कड़ा निर्देश दिया है कि अग्नि सुरक्षा सप्ताह के दौरान की गई गतिविधियों की फोटो/वीडियो सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य मंत्रालय को टैग करते हुए साझा करें। साथ ही, Fire Safety Assessment Report को अनिवार्य रूप से IHIP पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश दिया गया है।
इस कार्यक्रम में जिला भी.बी.डी. पदाधिकारी, आर.सी.एच. पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, एपिडेमोलॉजिस्ट, अस्पताल प्रबंधक और एएनएम/जीएनएम सहित भारी संख्या में स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।