दुद्धी सोनभद्र।(विवेक सिंह)
स्थानीय तहसील परिसर के श्री रामलीला मंच में श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा वाचक बाल व्यास मानस जी महाराज ने भक्तों से कहा कि भागवत ज्ञान भक्ति और नई चेतना का स्रोत है जो व्यक्ति को परोपकार और करुणा की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति भगवान की शरण में रहता है, वह दूसरे के दुःख को अपने दुःख के समान समझता है।
कथा के दौरान मानस जी ने कहा कि सत्संग और भागवत का श्रवण ममत्व की ओर खींचता है। उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि अश्वत्थामा द्वारा द्रौपदी के पुत्रों के वध पर गुरु माता का दुख भी समझने योग्य है। यह उदाहरण उन्होंने यह बताने के लिए दिया कि सत्संग सिखाता है कि अपने दुःख से दूसरे के दुःख का अंदाजा लगाना चाहिए।
मानस जी ने आगे कहा कि भागवत ज्ञान जीवदया, सत्य, प्रेम और करुणा का केन्द्र है और यही मनुष्य का वास्तविक ठौर है। उन्होंने कहा कि भगवत् लीला यह संदेश देती है कि ईश्वर प्रत्येक कण में निहित है, इसलिए किसी भी जीव को खाने से पहले उसके बारह अवतारों का स्मरण करना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने सुकर (सूअर) के रूप में भगवान के अवतार का उल्लेख करते हुए मानवता और समता का संदेश दिया।
कथा के अंत में बाल व्यास मानस जी ने उपस्थितजन से कहा कि वे जीवों पर दया करें और हिंसा का परित्याग करें। उन्होंने जुलूस सहित झोली फैलाकर पंडाल में बैठे लोगों से मांसाहार त्याग का आह्वान किया। इस पर अनेक भक्तों ने हाथ उठाकर अपनी गलतियों के लिए क्षमायाचना की और मांसाहार छोड़ने का संकल्प लिया। पंडाल में बैठे श्रोतागणों ने जयकारे लगाकर उनका अभिवादन किया।