राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी।
शहर में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के पदाधिकारियों द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग उठाए जाने के बाद यह मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। संगठन के पदाधिकारियों ने इसे देश में भाईचारा, शांति और सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी एवं मध्यप्रदेश के मुफ़्तिये आज़म मौलाना अहमद साहब के विचारों का समर्थन करते हुए कटनी इकाई ने भी गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने की वकालत की है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद कटनी के जनरल सेक्रेटरी अब्दुल कादिर खान ने कहा कि देश में हिंदू समाज की गाय के प्रति गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाता है, तो इससे गाय के नाम पर होने वाले विवाद, हिंसा और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी मांग की कि गाय की खरीद-फरोख्त और गौवंश वध पर कानूनी रूप से पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि समाज में शांति और आपसी सद्भाव बना रहे। संगठन का कहना है कि यह पहल किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि देश में भाईचारे और सामाजिक एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है।
इस मुहिम में जमीयत उलेमा कटनी के खजांची हाफिज़ अब्दुल रहीम की भी सक्रिय भूमिका सामने आई है। पदाधिकारियों ने कहा कि गाय के नाम पर होने वाले विवादों को समाप्त करने और समाज में विश्वास कायम करने के लिए यह एक स्थायी समाधान साबित हो सकता है।
मुस्लिम संगठन की ओर से आए इस बयान को कई लोग सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक समरसता की दिशा में सकारात्मक पहल के रूप में देख रहे हैं। वहीं, इस मांग को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक स्तरों पर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।