लोकेशन मोतिहारी
जिस आश्रम में रहने वाले वृद्धजन अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में दो वक्त की रोटी और सम्मान की उम्मीद लेकर रह रहे थे, वहां कई दिनों से भोजन तक बंद कर दिया गया।
आज उन बुजुर्गों को आश्रम से खाली कराकर ताला लगा दिया गया।
यह सिर्फ एक भवन पर ताला नहीं है, बल्कि उन असहाय बुजुर्गों की उम्मीदों, भावनाओं और सम्मान पर ताला लगाया गया है।
जिन हाथों ने कभी समाज और परिवार को संभाला, आज वही हाथ बेबसी में सहारे की तलाश कर रहे हैं।
क्या यही हमारा समाज और व्यवस्था है, जहां बुजुर्गों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है?
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से आग्रह है कि तत्काल वृद्धजनों के भोजन, रहने और इलाज की व्यवस्था की जाए।
किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसके बुजुर्गों के सम्मान और सुरक्षा से होती है।
बिहार मोतिहारी से ब्यूरो अमरजीत सिंह