गंगानगर जिले के सुरतगढ़।
क्षेत्र के चक 27 एमओडी में सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित पक्के खालों के निर्माण कार्य को लेकर किसानों ने गंभीर अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई है, जिसके कारण सरकारी धन और किसानों के हितों को नुकसान पहुंचा है।
किसानों के अनुसार पक्के खालों के निर्माण के लिए उनसे निर्धारित अंशदान राशि जमा करवाई गई। इसके अतिरिक्त पुराने खालों के स्ट्रक्चर को हटाने और तोड़ने के नाम पर किसानों से लगभग 6500 रुपये प्रति मुरब्बा की दर से अतिरिक्त राशि भी वसूली गई। किसानों का आरोप है कि इतनी राशि लेने के बावजूद निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे खालों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। किसानों ने बताया की खाले का निर्माण हो जाने के बाद भी साइडों में पटड़ा बंधाई नहीं की गयी जिससे कारण अगर खालो में पानी भरा गया तो पुरे खाला टूट सकता है किसानों ने ठेकेदार पर धमकाने का भी आरोप लगाया
ग्रामीणों ने बताया कि कई स्थानों पर सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। आरोप है कि कुछ किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए आवश्यक नक्के नहीं बनाए गए। विशेष रूप से अंतिम छोर पर स्थित किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था नहीं की गई, जबकि दूसरी ओर कुछ स्थानों पर आगे वाले किसानों को नक्का दे दिया गया, लेकिन पीछे स्थित किसानों को यह सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे अनेक किसानों को सिंचाई संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का यह भी कहना है कि सिंचाई विभाग के नियमों के अनुसार एक मुरब्बे में अधिकतम दो नक्के ही स्वीकृत किए जा सकते हैं। इसके विपरीत ठेकेदार ने किसानों से पैसे लेकर निर्माण कार्य के दौरान कई मुरब्बों में तीन से पांच नक्के कुछ बिग्गो के दायरे मे बना दिए हैं। तो वहीं अन्तिम छोर पर बैठे किसानों को नक्के ही नहीं दिए गये किसानों ने इसे विभागीय नियमों का उल्लंघन बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन प्रशासन की कथित उदासीनता, ठेकेदार की मिलीभगत और कुछ लोगों के निजी स्वार्थों के कारण सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और नियमों के अनुसार किया जाता तो अधिक संख्या में किसानों को इसका लाभ मिल सकता था।
क्षेत्र के किसानों ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराने, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लग सकेगी।