अकरम पटेल की रिपोर्ट
बैतूल
वन विकास निगम की रामपुर भतोड़ी प्रोजेक्ट के तहत आने वाली चूना हजूरी रेंज प्रथम एक बार फिर सुर्खियों में है। रेंज के कंपार्टमेंट नंबर 1382 में बड़े पैमाने पर सागौन की अवैध कटाई का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की घोर लापरवाही का फायदा उठाकर सागौन तस्कर बेखौफ होकर जंगलों का सफाया कर रहे हैं।
जंगल के अंदर ही बन रही ‘चरपट और सिल्लिया’
हैरानी की बात यह है कि तस्कर न सिर्फ पेड़ों की कटाई कर रहे हैं, बल्कि 1382 बांस नर्सरी क्षेत्र के भीतर, जंगल के बीचों-बीच ही सागौन की चरपट (तख्ते) और सिल्लिया तैयार कर रहे हैं। कंपार्टमेंट के भीतर बिखरे पड़े साक्ष्य और कटी हुई लकड़ियों के अवशेष वन विभाग और वन विकास निगम के सुरक्षा दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं।
बीट निरीक्षण पर उठे गंभीर सवाल; क्या सिर्फ कागजों पर दौड़ रहे अफसर?
इस पूरे घटनाक्रम ने वन विकास निगम के मैदानी अमले से लेकर उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रामपुर भतोड़ी प्रोजेक्ट के तहत जिस बड़े स्तर पर यह तस्करी और कटाई चल रही है, उससे साफ प्रतीत होता है कि:
नाकेदार और डिप्टी रेंजर से लेकर रेंजर, एसडीओ (SDO) तथा संभागीय प्रबंधक (DM) तक का बीट निरीक्षण केवल कागजों तक ही सीमित है।
यदि इन जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा मौके पर जाकर ईमानदारी से बीट निरीक्षण किया गया होता, तो मुमकिन था कि यह पूरा काला कारोबार बहुत पहले ही पकड़ में आ जाता।
“वनों का विकास” या “वनों का विनाश”?
स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा तेज हो गई है कि जंगल की सुरक्षा के प्रति बरती जा रही इस लापरवाही के कारण ‘वन विकास निगम’ अब वनों के विकास के बजाय, ‘वनों के विनाश’ के लिए ज्यादा चर्चाओं में बना हुआ है।