बिहार मोतिहारी से अमरजीत सिंह
पार्षद पति पर पक्षपात और अनियमितता के आरोप, कहा- न्यायालय का फैसला होगा सर्वमान्य
मोतिहारी: मोतिहारी नगर निगम क्षेत्र का वार्ड संख्या-26 इन दिनों विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और पक्षपात के आरोपों को लेकर चर्चा में है। वार्ड पार्षद मनीषा कुमारी के पति एवं पूर्व वार्ड पार्षद सुधीर कुमार पर वार्डवासियों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि वार्ड में हो रहे नाला और सड़क निर्माण कार्यों में पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है तथा विकास कार्यों का लाभ सभी मोहल्लों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है।
वार्ड के कुछ लोगों का आरोप है कि जिस गली या मोहल्ले से चुनाव में अधिक समर्थन और वोट मिले हैं, उन्हीं क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर सड़क, नाला और अन्य विकास कार्य कराए जा रहे हैं। वहीं जिन इलाकों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला, वहां विकास कार्यों की गति काफी धीमी है या काम नहीं के बराबर हुआ है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष का माहौल देखा जा रहा है।
इसी के साथ निर्माण कार्यों में संवेदक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। वार्डवासियों का कहना है कि कई निर्माण स्थलों पर संवेदक के रूप में संदीप कुमार का नाम अंकित है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संदीप कुमार और सुधीर कुमार आपस में भाई बताए जाते हैं। ऐसे में नगर निगम की नियमावली के तहत जनप्रतिनिधि के निकट संबंधियों की संवेदक के रूप में भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। लोगों ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जब इन आरोपों को लेकर दैनिक भास्कर की टीम ने वार्ड पार्षद मनीषा कुमारी के पति सुधीर कुमार से संपर्क किया तो उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज नहीं किया, बल्कि कहा कि उपरोक्त सभी मामले वर्तमान में लोक शिकायत निवारण विभाग में विचाराधीन हैं।
सुधीर कुमार ने कहा, “जो भी निर्णय सक्षम प्राधिकार और न्यायालय द्वारा लिया जाएगा, वह मेरे लिए सर्वमान्य और सर्वव्यापी होगा। मैं पिछले 20-25 वर्षों से वार्ड संख्या-26 की जनता की सेवा कर रहा हूं। जनता ने मुझ पर लगातार भरोसा जताया है, इसी कारण मुझे बार-बार जनप्रतिनिधि बनने का अवसर मिला है।”
फिलहाल वार्ड संख्या-26 में लगे इन आरोपों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब लोगों की निगाहें लोक शिकायत निवारण विभाग और संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।