नई दिल्ली, 29 जून: महाराष्ट्र शासन के “जैन अल्पसंख्यक विकास वित्त महामंडल” तथा भारत सरकार के “राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (NMDFC)” के बीच आज एक महत्वपूर्ण सामंजस्य समझौता (MoU) संपन्न हुआ।इस समझौते के तहत महाराष्ट्र के जैन समाज के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हेतु शैक्षणिक ऋण तथा युवा उद्यमियों को स्वरोजगार एवं उद्योग स्थापना के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम के मुख्यालय में आयोजित समारोह में हुए इस समझौते के अनुसार, महाराष्ट्र शासन के जैन अल्पसंख्यक विकास वित्त महामंडल को ₹100 करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह जानकारी महामंडल के अध्यक्ष (राज्य मंत्री) ललित गांधी ने दी।
उन्होंने बताया कि इस निधि के माध्यम से महाराष्ट्र के जैन समाज के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए रियायती शैक्षणिक ऋण तथा नवोद्यमी युवाओं को अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए आवश्यक वित्तीय सहयोग प्राप्त होगा। इससे जैन समाज के शैक्षणिक, आर्थिक एवं उद्यमिता विकास को नई गति मिलेगी तथा समाज के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान होगा।इस अवसर पर जैन अल्पसंख्यक विकास वित्त महामंडल की ओर से अध्यक्ष ललित गांधी एवं प्रबंध निदेशक मेघना शिंदे, जबकि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम की ओर से महाप्रबंधक अनिल कुमार ने निगम की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आभा रानी सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में सामंजस्य समझौते पर हस्ताक्षर किए।कार्यक्रम में जैन अल्पसंख्यक विकास वित्त महामंडल के समन्वयक संदीप भंडारी, विकास अच्छा, विपिन जैन तथा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम की ओर से जी.एम. (वित्त) कुमार सुदेश, जी.एम. (प्लानिंग) निक्सन माथुर, जी.एम. (अकाउंट्स) मनोज पुनिया एवं डी.जी.एम. पी. एस. पौणीकर भी उपस्थित रहे।इस समझौते से विशेष रूप से जैन समाज के निम्न आय वर्ग के विद्यार्थियों एवं नवोद्यमी युवाओं को सरकारी वित्तीय योजनाओं का व्यापक लाभ प्राप्त होगा। यह पहल महाराष्ट्र के जैन समाज के समग