बारीपदा, 15/08: भाषा, साहित्य, संस्कृति, कला एवं आध्यात्मिक चेतना के विकास के लिए पिछले 44 वर्षों से कार्यरत प्रतिश्रुति प्रतिष्ठान की ओर से 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला स्तरीय बहुभाषी कवि सम्मेलन, सारस्वत समारोह एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। बारीपदा स्थित जिलाधिकारी के सम्मेलन कक्ष ‘सद्भावना सभा गृह’ में प्रतिष्ठान के स्थायी अध्यक्ष डॉ. पार्थसारथी जेना की अध्यक्षता में यह भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ।प्रतिष्ठान के संस्थापक सचिव भागवत पंडा ने स्वागत भाषण देते हुए साहित्य सेवा को समाज, मानव और माधव की सेवा के समान बताया। उन्होंने कहा कि सद्साहित्य के प्रचार-प्रसार से परिवार में स्नेह और श्रद्धा बढ़ने के साथ घर को वैकुंठ में परिवर्तित किया जा सकता है।कार्यक्रम में महाराजा श्रीरामचंद्र भंजदेव विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर डॉ. प्रमोद कुमार षडंगी मुख्य अतिथि, जिला शिक्षा अधिकारी पूर्णचंद्र सेठी मुख्य वक्ता तथा बारीपदा नगरपालिका के नगरपाल कृष्णानंद महांती सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।मुख्य अतिथि डॉ. षडंगी ने कहा कि कविता शब्दों की एक जादुई कला है। इसकी लय में जीवन की संगीतमयता प्रतिबिंबित होने के साथ-साथ दुनिया के अनेक रहस्य भी उजागर होते हैं। उन्होंने बहुभाषी कवि सम्मेलन के माध्यम से विभिन्न भाषाओं के कवियों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने के प्रयास के लिए प्रतिष्ठान की सराहना की।मुख्य वक्ता पूर्णचंद्र सेठी ने कहा कि कविता की भाषा विशिष्ट होती है और इसका सृजन कवि की दिव्य भावनाओं से होता है। वहीं सम्मानित अतिथि नगरपाल कृष्णानंद महांती ने कहा कि सत्य एवं वास्तविकता के साथ कल्पना और सौंदर्यबोध के समन्वय से कविता सार्वभौमिकता प्राप्त करती है। उन्होंने लगातार 44 वर्षों से कविता पाठोत्सव आयोजित करने के लिए प्रतिश्रुति प्रतिष्ठान के प्रयासों की प्रशंसा की।इस अवसर पर प्रतिश्रुति प्रतिष्ठान के सर्वोच्च सम्मान ‘महाराजा श्रीरामचंद्र भंजदेव स्मृति सम्मान-2026’ से नगरपाल कृष्णानंद महांती को सम्मानित किया गया। उन्हें मानपत्र, उत्तरीय, पगड़ी, ट्रॉफी, भगवान श्रीजगन्नाथ की तस्वीर एवं पुष्पगुच्छ प्रदान किया गया। डॉ. संजीव कुमार पाणिग्राही ने मानपत्र का वाचन किया।इसके बाद कवयित्री सुधामयी दास एवं कवि गोपाल चंद्र साव के संयोजन में कविता पाठोत्सव आयोजित हुआ। इसमें ओड़िया, संस्कृत, अंग्रेजी, हिंदी, बंगला, हो, संथाली एवं मुंडारी सहित विभिन्न भाषाओं के 80 से अधिक कवि एवं कवयित्रियों ने हिस्सा लेकर अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रसिद्ध संगीत कलाकार सुश्री भारती बेबर्ता ने भगवान श्रीजगन्नाथ का भजन एवं ‘वंदे मातरम्’ प्रस्तुत किया। प्रतिष्ठान के अध्यक्ष डॉ. पार्थसारथी जेना ने कविताओं की समीक्षा करते हुए कहा कि साहित्य हमेशा समाज के हित में कार्य करता है। समाज को सही दिशा में संचालित करना साहित्यकारों का परम कर्तव्य है।अंत में कवि बनमाली पात्र ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।