बिना नंबर की गाड़ियां बुढार की सड़कों पर बेखौफ दौड़ रही हैं। सवाल यह है कि आखिर इन्हें रोकने वाला कौन है?
कबाड़ की गाड़ी पूछती है—
“भाई, बिना नंबर के बुढार में घूम रहे हैं… डर नहीं लगता कि पुलिस वाले रोक लेंगे?”
जवाब आता है—
“अरे, तू भी बच्चों जैसी बातें करता है! बुढार खाकी को नंबर से क्या लेना-देना? यहां तो बस ‘कड़क नोटों’ की गिनती होती है। अपना तो नो-स्टॉप वीआईपी पास चालू है!”
खाकी का यह कैसा नया गणित?
आम आदमी अगर गलती से हेलमेट पहनना भूल जाए, तो कार्रवाई के लिए पुलिस तुरंत सक्रिय हो जाती है। नियम-कायदे आम लोगों के लिए सख्त नजर आते हैं, लेकिन सवाल तब उठता है जब बिना नंबर की कबाड़ और शराब से जुड़ी गाड़ियां खुलेआम थाना क्षेत्र से गुजरती दिखाई दें।
आखिर इन वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इन गाड़ियों तक नहीं पहुंचती, या फिर मामला कुछ और है?
आम आदमी पर सख्ती, संदिग्ध वाहनों पर चुप्पी?
एक तरफ आम वाहन चालक से दस्तावेज, हेलमेट और नंबर प्लेट को लेकर सवाल किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ अगर बिना नंबर की गाड़ियां लगातार सड़कों पर दौड़ती रहें और उन पर कोई कार्रवाई न हो, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर नियम सभी के लिए बराबर हैं या फिर कुछ गाड़ियों के लिए अलग व्यवस्था चल रही है?
‘मंथली’ की चर्चा ने बढ़ाए सवाल
सबसे बड़ा सवाल उन चर्चाओं को लेकर है, जिनमें कथित तौर पर ‘मंथली’ और ‘हफ्ते’ जैसी बातें सामने आती हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है, लेकिन अगर ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी निष्पक्ष जांच जरूर करनी चाहिए।
क्योंकि अगर किसी वाहन का नंबर प्लेट, दस्तावेज और नियमों का पालन सिर्फ इसलिए नजरअंदाज किया जा रहा है कि उसके पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण है या किसी तरह का आर्थिक लेन-देन हो रहा है, तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है।
अब सवाल बुढार खाकी से…
क्या बिना नंबर की गाड़ियों पर कार्रवाई होगी?
क्या कबाड़ और शराब से जुड़ी संदिग्ध गाड़ियों की जांच की जाएगी?
क्या यह पता लगाया जाएगा कि आखिर ये वाहन बिना रोक-टोक कैसे निकल रहे हैं?
और सबसे बड़ा सवाल—अगर ‘मंथली’ या ‘हफ्ते’ के नाम पर किसी तरह का लेन-देन हो रहा है, तो इसकी जांच कौन करेगा?
साहब, कानून आम आदमी के लिए भी है और प्रभावशाली लोगों के लिए भी। अगर हेलमेट भूलने पर कार्रवाई हो सकती है, तो बिना नंबर की गाड़ियों पर भी वही सख्ती क्यों नहीं?
बुढार की जनता अब सवाल पूछ रही है—क्या नियम सच में सबके लिए बराबर हैं, या फिर कुछ गाड़ियों के लिए ‘नो-स्टॉप वीआईपी पास’ जारी है?
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इन सवालों का जवाब देते हैं या फिर मामला हमेशा की तरह फाइलों के बीच दबकर रह जाता है।