शिमिलिपाल अभयारण्य के प्रवेश द्वार पीठाबाटा में पर्यटकों की सुविधा तथा स्थानीय आदिवासी महिलाओं के आर्थिक विकास के उद्देश्य से ‘शिमिली कैफे’ का शुभारंभ किया गया।
72वें वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम खुटिया ने भुवनेश्वर से वर्चुअल माध्यम के जरिए कैफे का उद्घाटन किया। इस अवसर पर बांगिरीपोशी विधायक संजली मुर्मू भी उपस्थित रहीं और कैफे के शुभारंभ में शामिल हुईं।
राज्य सरकार की ‘आम शिमिलिपाल’ योजना तथा शिमिलिपाल टाइगर प्रोजेक्ट के सहयोग से लगभग 50 लाख रुपये के प्रारंभिक बजट में इस कैफे का निर्माण किया गया है। इसे पूरी तरह कम्युनिटी-बेस्ड मैनेजमेंट मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा।
कैफे में स्थानीय जनजातीय महिलाओं को खाना पकाने और आतिथ्य सेवा के क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे महिलाओं की आजीविका में सुधार होने के साथ-साथ जंगल पर उनकी निर्भरता को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
दूर-दराज से शिमिलिपाल पहुंचने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए कैफे में विश्राम, शौचालय तथा मयूरभंज के पारंपरिक खान-पान की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा शिमिलिपाल के जंगलों से संग्रहित शहद, झुणा, पालुआ सहित विभिन्न वन उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग और पैकेजिंग कर उन्हें इसी कैफे के माध्यम से बेचने की योजना है। इससे स्थानीय आदिवासी समुदाय को उनके वन उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
इस पहल का उद्देश्य एक ओर शिमिलिपाल आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय आदिवासी महिलाओं और समुदाय के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर पैदा करना भी है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।