दुद्धी (सोनभद्र)।(विवेक सिंह)देश में जारी जनगणना में आदिवासी धर्म कोड और अन्य पिछड़ा वर्ग के जाति कालम को जोड़ने की मांग पर प्रदेशव्यापी आव्हान पर आज बीडीओ म्योरपुर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान ने ज्ञापन भेजा। म्योरपुर ब्लॉक में विभिन्न आदिवासी संगठनों के उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा कि जनगणना में 1961 से पहले आदिवासी धर्म कोड का प्रावधान था। जिसे समाप्त कर दिया गया। देशभर के आदिवासी संगठनों की तरफ से लगातार उनकी विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक स्थितियों के अनुरूप आदिवासी धर्म कोड को जनगणना में शामिल करने की मांग से एकजुटता व्यक्त करते हुए इसे पूरा करने का अनुरोध किया गया।
नेताओं ने कहा कि 14 अगस्त 2026 को गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी राजपत्र में बिंदु संख्या 10 पर जाति कालम में अन्य पिछड़ा वर्ग का कालम नहीं जोड़ा गया है, जो गृह मंत्रालय द्वारा देश के संसद में जातिगत जनगणना कराने और उसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के कालम को जोड़ने की घोषणा के अनुरूप नहीं है। इसलिए मांग की गई कि तत्काल जारी भारत के राजपत्र में संशोधन कर अन्य पिछड़ा वर्ग के कालम को जोड़ा जाए और उसमें अति पिछड़ा वर्ग की भी आर्थिक-सामाजिक स्थिति की जनगणना कराई जाए। यह भी मांग की गई कि अति पिछड़ों के सामाजिक अधिकार पर बनी जस्टिस रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट को संसद के पटल पर रखा जाए और अति पिछड़ा वर्ग के अन्य पिछड़ा वर्ग में से आरक्षण कोटे को अलग किया जाए।
कार्यक्रम में आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के जिला संयोजक कृपाशंकर पनिका, आदिवासी वनवासी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद गोंड, पनिका महासभा के तुलसीराम पनिका, मंगरू प्रसाद श्याम, रामविचार गोंड आदि मौजूद रहे।