दुद्धी (सोनभद्र )।निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल निषाद पार्टी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी दुद्धी को सौंपा। ज्ञापन में विमुक्त जनजाति (DNT)/निषाद वंश की उपजातियों को अन्य राज्यों की तरह अनुसूचित जाति में शामिल करने और जातिगत जनगणना में ‘मझवार’ के कॉलम में अंकित करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि 31 अगस्त 1952 को केंद्र सरकार ने निषाद वंश की उपजातियों को विमुक्त जनजाति घोषित किया था और समाज इस दिन को ‘विमुक्त दिवस’ के रूप में मनाता है। 1931 की जनगणना के अनुसार केवट, मल्लाह, निषाद, बिन्द, कश्यप (कहार), तुरहा, माँझी और रैकवार जैसी जातियाँ एक ही वंश की पर्यायवाची हैं। ये उपजातियाँ अलग‑अलग राज्यों में अलग अलग आरक्षण श्रेणियों में हैं, जो अनावश्यक असमानता और अन्याय पैदा करती है। उदाहरण के तौर पर मल्लाह को दिल्ली व बंगाल में अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह पिछड़ी जाति में शामिल है।
पार्टी ने मांग की है कि जनगणना में उपयुक्त स्थान पर सभी पर्यायवाची जातियों को मझवार के कॉलम में दर्ज किया जाए और ब्रैकेट में ‘विमुक्त जाति’ स्पष्ट रूप से लिखा जाए, ताकि उनकी वास्तविक संख्या का सही आंकलन हो सके। साथ ही राज्य सरकार से अनुरोध किया गया है कि उत्तर प्रदेश में भी निषाद वंश की पर्यायवाची जातियों को अन्य राज्यों की तरह अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए।
ज्ञापन में संविधान समीक्षा आयोग (2000–02) के अध्यक्ष जस्टिस वेणकट चलैया की सिफारिश का हवाला देते हुए कहा गया है कि विमुक्त जनजातियों को महाराष्ट्र और पंजाब जैसी राज्यों की तरह शिक्षा व राजनीति में आरक्षण तथा पेंशन जैसी सुविधाएँ दी जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में निषाद वंश के शहीदों के गांव को आदर्श शहीद गांव घोषित करने की भी मांग की गई है।
ज्ञापन उपजिलाधिकारी दुद्धी अशोक कुमार गुप्ता को विधानसभा अध्यक्ष हृदय राम साहनी द्वारा सौंपा गया। पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी और समुदाय के प्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद रहे।