संरक्षण और विकास के लिए सरकारी सहायता की मांग
बारीपदा, 2/9: ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा की अनमोल स्मृतियों को संजोए हुए बारीपदा का चैतन्य पीठ आज भी आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, वर्ष 1510 ईस्वी में श्री चैतन्य महाप्रभु नदिया द्वीप से श्रीक्षेत्र पुरी की ओर यात्रा करते समय बारीपदा में एक दिन ठहरे थे। जिस स्थान पर उन्होंने विश्राम किया था, उसी की स्मृति को संजोने के लिए बाद में यहां चैतन्य पीठ की स्थापना की गई।हालांकि, इतने प्राचीन और धार्मिक महत्व वाले इस पीठ की वर्तमान स्थिति को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में चिंता देखी जा रही है। लोगों का आरोप है कि पीठ के रखरखाव, विकास और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से इस ऐतिहासिक स्थल का उचित संरक्षण किया जाए और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाए, तो आने वाले दिनों में चैतन्य पीठ बारीपदा के एक प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।इसी क्रम में आगामी 4 सितंबर को चैतन्य पीठ परिसर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके अगले दिन 5 सितंबर को नंद उत्सव का आयोजन किया जाएगा। दोनों दिनों में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ श्रद्धालुओं के लिए दोपहर 1 बजे प्रसाद सेवन की व्यवस्था की गई है।आयोजकों की ओर से अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से चैतन्य पीठ पहुंचकर उत्सव में शामिल होने का आह्वान किया गया है।वहीं, स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों ने सरकार से ऐसे प्राचीन धार्मिक पीठ और मठों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए विशेष ध्यान देने की मांग की है। लोगों का कहना है कि चैतन्य पीठ का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, नियमित रखरखाव और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाए, तो यह आने वाले दिनों में बारीपदा की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन स्थल बन सकता है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज की रिपोर्ट।