
बहेड़ी में किसानों का धरना चौथे दिन भी जारी, सपा ने दिया समर्थन; गन्ना भुगतान को लेकर केसर शुगर मिल पर बढ़ा दबाव
बहेड़ी (बरेली)। किसानों के गन्ने के बकाया भुगतान की मांग को लेकर बहेड़ी में भारतीय किसान यूनियन (भानु) का अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को चौथे दिन भी जारी रहा। आंदोलन को उस समय राजनीतिक समर्थन मिला, जब समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में धरनास्थल पर पहुंचे और किसानों की मांगों का समर्थन किया।
धरने के दौरान किसानों और सपा नेताओं ने केसर शुगर मिल प्रबंधन तथा भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जल्द से जल्द गन्ने का बकाया भुगतान कराने की मांग की।
सपा विधानसभा अध्यक्ष नासिर रजा खां ने भाजपा सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जिससे वे अपनी जमीनें मजबूरी में कम कीमत पर बेचने को मजबूर हों।
वहीं, सपा जिला पंचायत सदस्य इकबाल सिंह चिमा ने कहा कि किसान इस बार पीछे हटने वाले नहीं हैं और केसर शुगर मिल से गन्ने के बकाये का पूरा भुगतान मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरने में किसान नेता जुबैर सिद्दीकी ने किसानों की आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए दावा किया कि क्षेत्र का एक किसान धरने में शामिल होने के लिए पेट्रोल तक उधार लेकर पहुंचा। उन्होंने प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पूर्व में किसानों को लिखित आश्वासन देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में प्रशासन ने इससे इनकार कर दिया।
आंदोलन के दौरान किसानों ने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का मुद्दा भी उठाया। सपा कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि गन्ने का भुगतान नहीं मिलने के कारण एक किसान अपने बच्चे की स्कूल फीस जमा नहीं कर सका, जिसके चलते बच्चे की पढ़ाई प्रभावित हुई।
किसानों ने मिल से मिलने वाले उर्वरक पर ब्याज वसूले जाने को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि जब गन्ने का भुगतान मिल के पास लंबित है, तो किसानों से खाद की रकम पर ब्याज क्यों लिया जा रहा है।
भाकियू (भानु) और सपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक किसानों के खातों में गन्ने का पूरा बकाया भुगतान नहीं पहुंचता, तब तक धरना जारी रहेगा। आंदोलन के चौथे दिन किसानों की संख्या और राजनीतिक समर्थन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर सियासी सरगर्मी भी तेज हो गई है।
नोट: किसानों और सपा नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर केसर शुगर मिल प्रबंधन या प्रशासन का पक्ष इस विवरण में उपलब्ध नहीं है।