छत्तीसगढ़ की राजनीति में फाइलों, बयानों और बैठकों की गंभीर दुनिया को छोड़ अचानक 40 साल पुराना रेट्रो दौर लौट आया है। सोशल मीडिया पर इन दिनों तूफान मचा रहे ‘1980s Retro AI Trend’ के रंग में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत उनकी पूरी कैबिनेट रंग गई है। सीएम से लेकर दोनों डिप्टी सीएम और तमाम मंत्रियों की 80 के दशक के विंटेज स्टाइल वाली तस्वीरें इंटरनेट पर आग की तरह वायरल हो रही हैं।
खादी के कुर्ते से ‘बेलबॉटम’ और रेट्रो हेयरस्टाइल तक का सफर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस नए ट्रेंड में साय कैबिनेट के नेताओं का रूप-रंग ऐसा बदला है कि पहली नजर में पहचानना मुश्किल हो जाए विंटेज स्टाइल और फिल्मी रंगत: 80 के दशक के बड़े कॉलर वाले कुर्ते, रेट्रो धूप के चश्मे (एविएटर लुक), उस दौर की क्लासिक हेयरस्टाइल और एनालॉग कैमरे की हल्की पीली-दानेदार (Grainy) टोन।साय और शर्मा की रेट्रो जोड़ी: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का गंभीर चेहरा 80 के दशक के युवा राजनेता की तरह दिख रहा है, तो वहीं डिप्टी सीएम विजय शर्मा और अरुण साव किसी रेट्रो हिंदी सिनेमा के हीरो के गेटअप में नजर आ रहे हैं।पूरी कैबिनेट शामिल: मंत्री ओ.पी. चौधरी, लक्ष्मी राजवाड़े, श्यामबिहारी जायसवाल, दयालदास बघेल से लेकर गुरु खुशवंत साहेब तक सभी की ‘टाइम ट्रैवल’ वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही हैं।
जनसंपर्क का नया हथियार या गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने का खेल?
डिजिटल दौर में जहां नेताओं की छवि गंभीर और सख्त मानी जाती है, वहां पूरी कैबिनेट का इस तरह ट्रेंडिंग कल्चर में कूदना चर्चा का विषय बन गया है।युवाओं को साधने की डिजिटल चाल: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया की नई पीढ़ी (Gen-Z) से कनेक्ट करने के लिए सत्ताधारी दल अब पारंपरिक विज्ञापनों के बजाय ऐसे पॉप-कल्चर और AI ट्रेंड्स का सहारा ले रहा है, ताकि नेताlओं की स्वीकार्यता और रीच बढ़े।
विपक्ष और आलोचकों के तीखे तीर: दूसरी तरफ विरोधी इसे आड़े हाथों लेने से नहीं चूक रहे। आलोचकों का कहना है कि जब प्रदेश में गड्ढों वाली सड़कें, प्रशासनिक लचरता और बुनियादी समस्याएं सिर उठाए खड़ी हैं, तब पूरी कैबिनेट सोशल मीडिया पर ‘विंटेज मॉडलिंग’ और टाइमपास करने में मशगूल है।
क्या है यह ‘1980s Retro AI Trend’?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह ट्रेंड आधुनिक तस्वीरों को AI एल्गोरिद्म के जरिए 1980 के दशक के कैमरे, पहनावे, बैकग्राउंड और कलर ग्रेडिंग में तब्दील कर देता है। आम यूजर्स और बॉलीवुड सितारों के बाद अब छत्तीसगढ़ के सत्ताधीशों की मौजूदगी ने इसे सियासी रंग दे दिया है।
तस्वीरें भले ही मनोरंजक लग रही हों, लेकिन सवाल वही है—क्या डिजिटल स्क्रीन पर 80 के दशक में लौटी सरकार जमीनी स्तर पर 2026 के वादों और चुनौतियों को उसी रफ्तार से पूरा कर पाएगी?
अभिषेक कुमार पाण्डेय रिपोर्टर छत्तीसगढ़