बारिपदा, 7/10: मयूरभंज जिले का राजनीतिक माहौल अब धीरे-धीरे गर्माता जा रहा है। आगामी 8 अक्टूबर को प्रस्तावित ओडिशा बंद को सफल बनाने के उद्देश्य से बुधवार शाम बारिपदा शहर में मयूरभंज पूर्व कांग्रेस की ओर से एक विशाल जनजागरूकता रैली निकाली गई।
शाम करीब 5 बजे बालेश्वर गोलई के पास से शुरू हुई इस रैली में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यकर्ताओं के हाथों में पार्टी के झंडे, बैनर और प्लेकार्ड नजर आए। बालेश्वर गोलई से शुरू हुई रैली मुख्य बाजार, बाण्ठिया मंदिर और बीजू पटनायक चौक होते हुए जिलाधिकारी कार्यालय के पास पहुंची।
रैली के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और लोगों से आगामी 8 अक्टूबर के ओडिशा बंद को सफल बनाने का आह्वान किया। शहर के विभिन्न चौक-चौराहों और बाजारों से होकर गुजर रही रैली को देखने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ भी नजर आई।
खास बात यह रही कि लंबे समय बाद बारिपदा शहर में कांग्रेस की इतनी बड़ी रैली देखने को मिली। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। रैली में पार्टी के जिला स्तर के नेताओं से लेकर बड़ी संख्या में आम कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और उत्साह को देखते हुए राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि कांग्रेस मयूरभंज में एक बार फिर अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में प्रयास कर रही है।
रैली को लेकर स्थानीय लोगों के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं सुनने को मिलीं। कुछ लोग इसे कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन बता रहे हैं, तो कुछ इसे आने वाले दिनों में जिले की राजनीतिक लड़ाई का संकेत मान रहे हैं।
विशेष रूप से भाजपा, बीजद, झारखंड पार्टी और अन्य राजनीतिक शक्तियों के साथ आने वाले दिनों में कांग्रेस की राजनीतिक टक्कर और अधिक तेज होने की संभावना को लेकर भी चर्चा चल रही है।
हालांकि, इस रैली का मुख्य उद्देश्य आगामी 8 अक्टूबर के ओडिशा बंद को लेकर आम जनता को जागरूक करना और बंद को सफल बनाने के लिए समर्थन जुटाना था। रैली के माध्यम से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार की विभिन्न नीतियों को लेकर अपना असंतोष व्यक्त किया और जनता के बीच अपनी मांगों एवं राजनीतिक रुख को पहुंचाने का प्रयास किया।
अब सवाल यह है कि क्या यह विशाल रैली सिर्फ ओडिशा बंद से पहले कांग्रेस का एक जनजागरूकता कार्यक्रम था, या फिर मयूरभंज में पार्टी की बढ़ती सांगठनिक ताकत का बड़ा संकेत? इसका जवाब आने वाले दिनों में जिले के राजनीतिक घटनाक्रम से ही मिलेगा।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।