सोनभद्र। जनजातीय समुदायों के पीढ़ियों से संजोए जा रहे पारंपरिक औषधीय ज्ञान तथा स्थानीय जैव संसाधनों के संरक्षण एवं उपयोग की दिशा में सोनभद्र में महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा प्रायोजित परियोजना के तहत CSIR-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI), लखनऊ जनपद के जनजाति बहुल क्षेत्रों में शोध और सर्वेक्षण करेगा।
शनिवार को CSIR-NBRI के वैज्ञानिकों ने जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से मुलाकात कर परियोजना के उद्देश्य, कार्ययोजना तथा स्थानीय जैव संसाधनों के समुचित उपयोग पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और उनकी आजीविका को सशक्त बनाने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।परियोजना के अंतर्गत गोंड, बैगा, पनिका, चेरो और खरवार जनजातियों के पारंपरिक ज्ञान, औषधीय नुस्खों तथा दैनिक जीवन में प्रयुक्त वनस्पतियों की जानकारी एकत्र और दस्तावेजित की जाएगी। इसके साथ ही स्थानीय औषधीय पौधों तथा दुर्लभ एवं संकटग्रस्त जैव संसाधनों की पहचान कर उनके संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शोध के माध्यम से औषधीय पौधों की खेती और स्थानीय जैव संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। उद्देश्य है कि जनजातीय समुदायों की समृद्ध विरासत और प्राकृतिक जैव विविधता का संरक्षण करते हुए उन्हें रोजगार, आजीविका एवं सतत विकास से जोड़ा जाए।
परियोजना का संचालन NBRI के निदेशक डॉ. जहीर अहमद और मुख्य वैज्ञानिक डॉ. शरद श्रीवास्तव के नेतृत्व में हो रहा है। प्रारंभिक क्षेत्रीय कार्य की जिम्मेदारी वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मंजूषा श्रीवास्तव को दी गई है, जबकि प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विक्रमा सिंह सहित अनिल द्विवेदी, अनुपमा देवी और दिव्यांश राज टीम में सहयोग करेंगे।
जिलाधिकारी ने कहा कि सोनभद्र की जनजातीय विरासत, पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक जैव विविधता को संरक्षित करते हुए इसे जनजातीय समुदायों की आजीविका एवं सतत विकास से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
