देवशोल में प्रखंडस्तरीय माझी परगना सभा आयोजित, शिक्षा और संस्कृति के संरक्षण का दिया गया संदेश
रासगोविंदपुर, 31 अक्टूबर: आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और ग्रामसभा की शक्तियों के प्रति जनजागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से मयूरभंज जिले के रासगोविंदपुर प्रखंड अंतर्गत देवशोल स्थित बुद्धेश्वर महादेव मेला मैदान में एक दिवसीय प्रखंडस्तरीय माझी परगना सभा का आयोजन किया गया।
इस सभा का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज में शिक्षा, सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण करने के साथ-साथ सामाजिक विकास का संदेश देना था। मुख्य आयोजक रामचंद्र टुडू के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन तथा रासगोविंदपुर प्रखंड के विभिन्न गांवों के माझी बाबाओं के सहयोग से कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मयूरभंज एससीडीसी के अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् बुधान मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि इंजीनियर पूर्णचंद्र हेम्ब्रम ने मुख्य वक्ता के रूप में अपनी बात रखी।
सभा के दौरान आदिवासी समाज के लिए भारतीय संविधान में किए गए विशेष प्रावधानों, संवैधानिक अधिकारों, पेसा कानून के महत्व तथा ग्रामसभा की भूमिका और शक्तियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
अतिथियों ने कहा कि आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में माझी बाबाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने नई पीढ़ी को शिक्षित करने, अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखने तथा समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सभी लोगों से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने आदिवासी समाज की ऐतिहासिक विरासत, परंपराओं और सामाजिक एकता को मजबूत बनाने के साथ-साथ प्रत्येक गांव में संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने पर विशेष जोर दिया।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में देवशोल गांव के बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं सहित सभी ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग सराहनीय रहा।
कार्यक्रम में माझी मां पांजी के घनश्याम मुर्मू, दामोदर बास्के, रूपाय किस्कू, साल मुर्मू और पिरु टुडू सहित बड़ी संख्या में माझी बाबा एवं आदिवासी समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस सभा में डेढ़ सौ से अधिक गांवों के माझी बाबाओं ने भाग लेकर विचार-विमर्श में हिस्सा लिया।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज, स्टेट हेड।
