ब्यूरो चीफ सुंदरलाल जिला सोलन हिमाचल प्रदेश
केंद्रीय विद्यालय सुबाथू के विद्यार्थियों के लिए आज का दिन ज्ञान, असीम उत्साह और रोमांच से भरा रहा। विद्यालय प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों के लिए सुबाथू स्थित प्रसिद्ध काली माता मंदिर के समीप ऐतिहासिक सुबाथू किले का एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यात्रा की शुरुआत सुबह विद्यालय प्रांगण से अत्यंत ऊर्जावान व सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, जहाँ वरिष्ठ शिक्षकों ने सभी छात्रों को आवश्यक सुरक्षा नियमों, कड़े अनुशासन और दिन की पूरी रूपरेखा संबंधी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश विस्तारपूर्वक समझाए।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने इस ऐतिहासिक किले की अनूठी वास्तुकला, सामरिक महत्व और गोरखा युद्धों से जुड़े गौरवशाली इतिहास को बहुत करीब से देखा व समझा। इसी कड़ी में छात्रों को ’14 गोरखा प्रशिक्षण केंद्र’ के गौरवमयी इतिहास, अद्वितीय वीरता और समृद्ध सैन्य परंपराओं पर आधारित एक विशेष वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) भी दिखाई गई, जिसे देखकर सभी विद्यार्थी अत्यंत प्रेरित व रोमांचित हुए। इस पूरे शैक्षणिक भ्रमण के दौरान 14 जीटीसी सुबाथू के सैन्य अधिकारियों ने छात्रों का अत्यंत कुशल मार्गदर्शन किया और उन्हें हर कदम पर बहुमूल्य सहायता प्रदान की। अधिकारियों ने अत्यंत आत्मीयता से विद्यार्थियों को रेजिमेंट के ऐतिहासिक युद्धों, कठोर प्रशिक्षण प्रणाली और जीवन में अनुशासन के वास्तविक महत्व से अवगत कराया। सैन्य कर्मियों की प्रेरक उपस्थिति और उनकी सारगर्भित जानकारी ने छात्रों के इस अनुभव को और अधिक ज्ञानवर्धक, अविस्मरणीय व सार्थक बना दिया। इसके उपरांत शांत व मनोरम पहाड़ियों के बीच स्थित ऐतिहासिक काली माता मंदिर के दर्शन कर विद्यार्थियों ने क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक मान्यताओं, सांस्कृतिक जड़ों और स्थानीय जनमानस की आस्था की भी गहरी जानकारी प्राप्त की।
छात्रों ने आपस में समूह चर्चा में भाग लेते हुए किले के सदियों पुराने अवशेषों, मजबूत प्राचीरों और पारंपरिक निर्माण शैली का बारीकी से अध्ययन किया तथा अपनी अध्ययन डायरियों में मुख्य बिंदुओं को तत्परता से दर्ज किया। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, ऐसे ज्ञानवर्धक दौरों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर वास्तविक धरातल व प्रत्यक्ष अनुभव से जोड़ना है। इस विशेष भ्रमण से छात्रों को जीवंत इतिहास का व्यावहारिक अनुभव मिला, भारतीय सेना के अदम्य साहस और शौर्य की गहरी समझ विकसित हुई तथा देश की प्राचीन ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन व सम्मान के प्रति जिम्मेदारी का अटूट भाव जागृत हुआ।
