रविवार को कलेक्ट्रेट परिसर के सामने मां नर्मदा सेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने नर्मदाखंड राज्य बनाने की मांग की। इसे लेकर कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। मां नर्मदा सेवक संघ की मांगों का समर्थन करने जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रेश परस्ते अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने बताया कि अलग राज्य बनाने की मांग नर्मदांचल क्षेत्र के विकास और अस्तित्व की रक्षा के लिए की जा रही है।
नर्मदाखंड राज्य बनने से होगा क्षेत्र का विकास
ज्ञापन में उल्लेख करते हुए अध्यक्ष धुनेश्वरी धुर्वे ने बताया कि नर्मदांचल क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से पृथक पहचान आदिकाल से है। लेकिन राजनीतिक उदासीनता और उपेक्षा के चलते क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। नर्मदांचल क्षेत्र के संपूर्ण विकास के लिए नर्मदाखंड राज्य में छत्तीसगढ़ राज्य के गौरेला, मध्यप्रदेश के इंदौर, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, मंडला, होशंगाबाद, कटनी, अनूपपुर, देवास, नरसिंहपुर, रायसेन, बैतूल, सिवनी, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, सीहोर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सागर, हरदा और महाराष्ट्र के नंदूरबार, धुले, नासिक, जलगांव और गुजरात राज्य के नर्मदा, भरूच, बड़ोदरा, छोटा उदयपुर, सूरत, वलसाड, डांग, नवसारी, तापी कुल 38 जिलों को मिलाकर गठित किया जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रेश परस्ते, रमेश राजपाल, हरि सिंह मरावी, त्रिलोक सिंह ठाकुर, कुंजन सिंह, महेंद्र परस्ते, अरुण कुमार, अशोक धुर्वे,आकाश यादव, मनीष दुबे, जनपद सदस्य संतोष कुमार ठाकुर, निशान यादव सहित कार्यकर्ता मौजूद रहे।