जिला कारागार उरई का निरीक्षण कर बंदियों की समस्याएं सुनी एवं दिशा-निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जनपद न्यायाधीश अचल सचदेव ने शुक्रवार को जिला कारागार उरई का मासिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न बैरकों का दौरा कर निरुद्ध बंदियों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। निरीक्षण के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अपर जिला जज पारुल पंवार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे व जेल प्रशासन के अधिकारीगण उपस्थित रहे। जनपद न्यायाधीश ने निर्देशित किया कि जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता नहीं हैं, या जिनकी पैरवी नहीं हो पा रही है, उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। ऐसे मामलों में सरकारी खर्चे पर अधिवक्ता नियुक्त कर ‘एमाइकस क्यूरी’ की सुविधा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जो बंदी दोषसिद्ध हो चुके हैं और जिनकी अपील अब तक दाखिल नहीं हो सकी है, उनके मामलों में नियमानुसार ‘जेल अपील’ की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को इस प्रक्रिया में समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए। महिला बंदियों व उनके साथ रह रहे बच्चों के भोजन, स्वास्थ्य और देखभाल के बारे में भी जानकारी ली गई। वहीं, 18 से 21 वर्ष के किशोर अपचारियों की शिक्षा व्यवस्था के विषय में पूछने पर जेल अधीक्षक ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग की मदद से एक शिक्षक का सम्बद्धीकरण किया गया है। जिला जज ने जेल अधीक्षक को निर्देशित किया कि जिन विचाराधीन बंदियों को जमानत मिल चुकी है लेकिन जमानतदार नहीं मिलने के कारण वे रिहा नहीं हो पा रहे हैं, उनकी सूची जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को तत्काल सौंपी जाए, ताकि उनकी रिहाई सुनिश्चित कराई जा सके। इस अवसर पर जेल अधीक्षक नीरज देव, कारापाल प्रदीप कुमार, उपकारापाल अरविंद सिन्हा, अमर सिंह व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक शुभम शुक्ला मौजूद रहे।
(अनिल कुमार ओझा ब्यूरो प्रमुख
उरई-जालौन) उत्तर प्रदेश