मऊगंज, मध्य प्रदेश। क्या धर्मस्थल अब दलाली और नशे के कारोबार का अड्डा बन चुके हैं? मऊगंज जिले के ग्राम पंचायत सीतापुर में हालात कुछ ऐसे ही सवाल खड़े कर रहे हैं। मंदिर की पवित्र जमीन पर कोरेक्स की सीसी मिलना, वहां अंडे-मुर्गे की दुकानें खुलना, और उसके इर्द-गिर्द सरकारी जमीन पर अतिक्रमण होना — ये सब अब आम बात हो चुकी है। लेकिन इससे भी ज्यादा चिंता की बात है कि इन सबके बीच प्रशासन की भूमिका एक मूकदर्शक की बनकर रह गई है। सीतापुर में नायब तहसीलदार की मोगरे साहब को बार-बार जानकारी देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। PWD के पास की जमीन पर खुलेआम अतिक्रमण कर लिया गया, नोटिस तो बांटे गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई आज तक नहीं हुई। कारण? यहां सक्रिय कुछ **स्थानीय दलाल, जिन्होंने कथित तौर पर “महीनवारी” बंद कर रखी है – यानी हर महीने कुछ लोगों को पैसा देकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि कार्रवाई न हो। सूत्रों के अनुसार यहां के सरपंच ने स्वयं लिखित आदेश दिए हैं कि मंदिर के सामने से गोमती हटाई जाए, अवैध कब्जे हटाए जाएं,और नशे तथा मांसाहारी वस्तुओं की बिक्री बंद की जाए। लेकिन अफसोस, न तो प्रशासन हरकत में आया, न ही स्थानीय अधिकारियों की अंतरात्मा जागी। धर्म के नाम पर यहां के अधिकारी “लेन-देन” में व्यस्त हैं। मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल ने इस मंदिर क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने की कई कोशिशें कीं, लेकिन जब प्रदेश के वरिष्ठ नेता और देवतलाव विधायक गिरीश गौतम जैसे लोग मामले को ‘तमाशा’ बना दें, तो फिर व्यवस्था का भगवान ही मालिक है। हमारा सवाल सीधा है – क्या धार्मिक स्थल अब लेन-देन और दलाली का केंद्र बन चुके हैं? क्या प्रशासन की जिम्मेदारी अब सिर्फ दिखावे की रह गई है? हम मऊगंज के नए तहसीलदार और कलेक्टर संजय कुमार जैन से अपील करते हैं कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लें। क्योंकि यह सिर्फ अतिक्रमण नहीं, बल्कि धर्म, कानून और समाज – तीनों के अपमान की खुली कहानी है। यदि समय रहते ऐसे अधिकारी और दलालों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो मऊगंज की छवि एक भ्रष्ट और मूक प्रशासन वाले क्षेत्र के रूप में स्थापित हो जाएगी।
(ब्यूरो चीफ रीवा) कृष्णा द्विवेदी