नरेश सोनी
इंडियन टीवी न्यूज
ब्यूरो हजारीबाग।
हूल दिवस: वीर शहीदों के नाम पर राजनीति न करें – मोहम्मद हकीम
हजारीबाग: संथाल परगना के ऐतिहासिक स्थल भोगनाडीह में हूल दिवस के अवसर पर जो घटनाएं सामने आई हैं, वे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। यह बेहद चिंताजनक है कि जिस दिन वीर सिद्धू-कान्हू के बलिदान को याद किया जाना चाहिए, उस दिन राजनीतिकरण और प्रशासनिक दमन की घटनाएं सामने आईं।
भोगनाडीह में प्रशासन द्वारा जो बल प्रयोग किया गया—जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग शामिल है—वह पूरी तरह से एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र की बू देता है। इस घटना पर भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी तथा आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो द्वारा दिए गए बयान न केवल हास्यास्पद हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि किस तरह से आदिवासी अस्मिता और बलिदान का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है।
जो लोग हूल दिवस पर आदिवासियों के समर्थन का दिखावा कर रहे हैं, उनका असली चेहरा अब जनता के सामने आ चुका है। यह साफ नजर आता है कि भीड़ इकट्ठा करने और घटना को उकसाने में भी एक सोची-समझी रणनीति थी।
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन और झामुमो के बागी विधायक लोबिन हेम्ब्रम पर भी आदिवासियों को गुमराह करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि झारखंड के निर्माता माननीय शिबू सोरेन जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं, और ऐसे संवेदनशील समय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भोगनाडीह कार्यक्रम में उपस्थित न होना भी कई सवाल खड़े करता है।
आज जबकि हम सिद्धू-कान्हू जैसे वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं, विपक्ष द्वारा किया गया यह राजनैतिक नाटक न केवल शहीदों का अपमान है, बल्कि झारखंड की आत्मा के साथ भी विश्वासघात है।
मैं, मोहम्मद हकीम, केंद्रीय महासचिव, खतियानी परिवार, इस षड्यंत्र का खुलासा करते हुए यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि हम आदिवासी समाज और शहीदों के सम्मान पर किसी प्रकार की राजनीति को सहन नहीं करेंगे।
धन्यवाद।