नरेश सोनी
इंडियन टीवी न्यूज
ब्यूरो हजारीबाग
हजारीबाग जिला प्रशासन की सराहनीय पहल: आधार कार्ड बना मानसिक दिव्यांग बालक के घर लौटने का जरिया
हजारीबाग : 1 जुलाई 2025 बाल संरक्षण और पुनर्वास के क्षेत्र में हजारीबाग जिला प्रशासन ने एक अनुकरणीय कार्य करते हुए एक मानसिक रूप से दिव्यांग बालक को उसके परिजनों से मिलवाया। यह पुनर्मिलन आधार कार्ड के माध्यम से संभव हो सका, जिसने बालक की पहचान और मूल निवास का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह बालक अप्रैल 2023 में भटकता हुआ बाल कल्याण समिति, रांची को मिला था, जहां से उसे देखभाल और संरक्षण हेतु बाल गृह जन जागरण केंद्र, बरही (हजारीबाग) भेजा गया। चूंकि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ था, इसलिए वह अपना नाम, पता या कोई भी जानकारी देने में असमर्थ था।
कुछ दिनों पूर्व उसकी चिकित्सा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उसे सदर अस्पताल, हजारीबाग में इलाज के लिए भेजा गया। साथ ही, दिव्यांगता प्रमाण पत्र और आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया शुरू की गई। आधार नामांकन के दौरान यूआईडी प्रोजेक्ट पदाधिकारी प्रवीण कुमार द्वारा यह जानकारी मिली कि बालक का आधार पहले से बना हुआ है। इस आधार पर उसकी पहचान बिहार राज्य के मधुबनी जिले के निवासी के रूप में हुई।
इसके बाद, जिला बाल संरक्षण इकाई, मधुबनी से संपर्क कर बालक के परिवार का पता लगाया गया और सत्यापन उपरांत, आज 1 जुलाई 2025 को बालक की दादी, चाचा और चचेरा भाई हजारीबाग पहुंचे। बाल कल्याण समिति, हजारीबाग के निर्देशानुसार बालक को विधिवत रूप से परिजनों को सौंप दिया गया।
इस अवसर पर उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने बालक के परिजनों से मुलाकात की और उसके भविष्य की देखभाल, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर आवश्यक सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि, “ऐसे मामलों में प्रशासन और समाज की साझा जिम्मेदारी होती है कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में जीवन जीने का अवसर मिले। आधार कार्ड जैसी योजनाएं बाल संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकती हैं।”